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इस बौद्ध भिक्षु डॉक्टर ने किया कैंसर का इलाज, अब मिला पद्मश्री अवार्ड

Sun, 28 Jan 2018 10:13 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, धर्मशाला
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बौद्ध भिक्षु को पद्मश्री मिलने से निर्वासित तिब्बत सरकार में खुशी की लहर है। इस बौद्ध भिक्षु डॉक्टर ने कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी का इलाज किया और अब पद्मश्री अवार्ड पाया है।

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तिब्बती चिकित्सा पद्धति में बेहतरीन कार्य के बूते भारत सरकार की ओर से पद्मश्री अवार्ड मिलने के बाद धर्मगुरु दलाईलामा के निजी चिकित्सक रह चुके 94 वर्षीय बौद्ध भिक्षु डॉ. येशी ढोंडेन ने केंद्र का धन्यवाद किया।

उन्होंने कहा कि मुझे नहीं मालूम कि यह अवार्ड कैसे मिला। शायद, हजारों मरीजों की दुआओं ने यह सम्मान दिलाया है। डॉ. येशी ने कहा कि अवार्ड मिलने से वह बेहद खुश हैं।
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इसका श्रेय पिछले 50 वर्षों में मेरे इलाज से ठीक हुए हजारों मरीजों को जाता है। यह अच्छा है कि तिब्बतियन चिकित्सा पद्धति की वजह से हजारों मरीज ठीक हुए हैं। तिब्बतियन दवाइयां भारत में ही पैदा होती हैं इसलिए यह भारतीय आयुर्वेदा से मिलती-जुलती हैं।

तिब्बतियन दवाइयां 7वीं शताब्दी में तिब्बत में भारत से बुद्धिज्म से लाई गई थीं। भारत सरकार ने शुरू से ही तिब्बतियन दवाओं को विशेष पहचान दी है। उन्होंने कहा कि वह तिब्बतियन चिकित्सा संस्थान धर्मशाला के प्रमुख भी रहे हैं।

निर्वासित तिब्बत सरकार की धर्म एवं संस्कृति मंत्री वेन करमा गेलेक ने बताया कि डॉ. येशी को पद्मश्री मिलने से बेहद खुशी है। डॉ. येशी का तिब्बत के लोका क्षेत्र में 15 मई 1927 को जन्म हुआ है। उनका परिवार तिब्बत की चिकित्सा पद्धति के लिए प्रसिद्ध रहा है। 

 डॉ. ढोंडेन इस वर्ष रखी तिब्बती चिकित्सा पद्धति की नींव

 डॉ. येशी ढोंडेन ने 23 मार्च 1961 को तिब्बत से भारत में शरणार्थी के रूप में आकर तिब्बती चिकित्सा पद्धति की नींव रखी उन्होंने धर्मशाला में तिब्बतियन मेडिकल एंड एस्ट्रो इंस्टीट्यूट की स्थापना कर तिब्बतियन चिकित्सा पद्धति को आगे बढ़ाया  वह वर्ष 1961 से लेकर 1980 तक दलाईलामा के निजी चिकित्सक के रूप में कार्यरत रहे 

कैंसर के इलाज के लिए हैं प्रख्यात 
डॉ. येशी ने दलाईलामा के निजी चिकित्सक के रूप में काम करने के बाद मैक्लोडगंज में अपना निजी क्लीनिक खोला। डॉ. येशी के पास दुनिया भर से विशेषकर कैंसर रोगी इलाज के लिए आते हैं। डॉ. येशी रोगी के पेशाब और नब्ज का अध्ययन कर दवाई देते हैं। यहां पर टोकन सिस्टम से रोगियों का इलाज होता है।
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इस वैज्ञानिक को भी ‌मिला पद्मश्री अवार्ड

पद्मश्री अवार्ड पाने वाले वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान देहरादून के पूर्व निदेशक वैज्ञानिक डॉ. विक्रम चंद ठाकुर मूलत: धर्मशाला के अपर श्यामनगर के रहने वाले हैं। वर्तमान में विक्रम चंद ठाकुर देहरादून में ही परिवार सहित रहते हैं।

डॉ. विक्रम वर्ष 2000 में वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान देहरादून के निदेशक बने थे। डॉ. विक्रम के साथ देहरादून में काम कर चुके केंद्रीय विवि छतड़ी में सेवाएं दे रहे भूकंप एवं भूमि क्षरण में विशेषज्ञ वैज्ञानिक एके महाजन ने बताया कि डॉ. विक्रम 13 वर्ष तक वाडिया संस्थान में निदेशक रहे।

उन्होंने उत्तर पश्चिम हिमालय का नक्शा तैयार किया। उन्होंने बताया कि डॉ. विक्रम ठाकुर ने धर्मशाला डिग्री कॉलेज में भूविज्ञान की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने पंजाब यूनिवर्सिटी से एमएससी की।

बाद में लंदन से उन्होंने पीएचडी की। वर्तमान में धर्मशाला के अपर श्यामनगर में डा. विक्रम ठाकुर के घर कोई भी सदस्य नहीं रहता है। हाल ही में धर्मशाला में उनकी माता का निधन हुआ है।
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