डॉ. येशी ढोंडेन ने 23 मार्च 1961 को तिब्बत से भारत में शरणार्थी के रूप में आकर तिब्बती चिकित्सा पद्धति की नींव रखी उन्होंने धर्मशाला में तिब्बतियन मेडिकल एंड एस्ट्रो इंस्टीट्यूट की स्थापना कर तिब्बतियन चिकित्सा पद्धति को आगे बढ़ाया वह वर्ष 1961 से लेकर 1980 तक दलाईलामा के निजी चिकित्सक के रूप में कार्यरत रहे
कैंसर के इलाज के लिए हैं प्रख्यात
डॉ. येशी ने दलाईलामा के निजी चिकित्सक के रूप में काम करने के बाद मैक्लोडगंज में अपना निजी क्लीनिक खोला। डॉ. येशी के पास दुनिया भर से विशेषकर कैंसर रोगी इलाज के लिए आते हैं। डॉ. येशी रोगी के पेशाब और नब्ज का अध्ययन कर दवाई देते हैं। यहां पर टोकन सिस्टम से रोगियों का इलाज होता है।
पद्मश्री अवार्ड पाने वाले वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान देहरादून के पूर्व निदेशक वैज्ञानिक डॉ. विक्रम चंद ठाकुर मूलत: धर्मशाला के अपर श्यामनगर के रहने वाले हैं। वर्तमान में विक्रम चंद ठाकुर देहरादून में ही परिवार सहित रहते हैं।
डॉ. विक्रम वर्ष 2000 में वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान देहरादून के निदेशक बने थे। डॉ. विक्रम के साथ देहरादून में काम कर चुके केंद्रीय विवि छतड़ी में सेवाएं दे रहे भूकंप एवं भूमि क्षरण में विशेषज्ञ वैज्ञानिक एके महाजन ने बताया कि डॉ. विक्रम 13 वर्ष तक वाडिया संस्थान में निदेशक रहे।
उन्होंने उत्तर पश्चिम हिमालय का नक्शा तैयार किया। उन्होंने बताया कि डॉ. विक्रम ठाकुर ने धर्मशाला डिग्री कॉलेज में भूविज्ञान की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने पंजाब यूनिवर्सिटी से एमएससी की।
बाद में लंदन से उन्होंने पीएचडी की। वर्तमान में धर्मशाला के अपर श्यामनगर में डा. विक्रम ठाकुर के घर कोई भी सदस्य नहीं रहता है। हाल ही में धर्मशाला में उनकी माता का निधन हुआ है।