शहरवासियों को करना होगा इंतजार, क्लीरीनेशन तकनीक से साफ किए पानी की ही होगी आपूर्ति
अभी टेंडर में सिर्फ एक ठेकेदार ने किया था आवेदन अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। शहरवासियों को सतलुज नदी से सप्लाई हो रहा पीने का पानी इस साल ओजोन तकनीक से शुद्ध नहीं होगा। अभी क्लोरीनेशन तकनीक से ही पानी को साफ किया जाएगा। सतलुज पेयजल योजना में ओजोनेशन तकनीक से पानी शुद्ध करने की योजना का टेंडर रद्द हो गया है।
पेयजल कंपनी के अनुसार इस काम के लिए एक ही ठेकेदार ने आवेदन किया था। इसके बाद इसे रद्द करने का फैसला लिया है। अब जून में दोबारा नए सिरे से टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी। ओजोन तकनीक से पानी को शुद्ध करने वाली सतलुज पेयजल योजना प्रदेश की पहली योजना बननी है। हालांकि इस साल योजना का काम सिरे चढ़ना मुश्किल है। 66 एमएलडी की क्षमता वाली सतलुज पेयजल योजना से शिमला शहर को 24 घंटे पानी मिलना है। विश्व बैंक की मदद से तैयार की जा रही इस योजना का पानी क्लोरीनेशन की बजाय ओजोन तकनीक से शुद्ध करने की तैयारी है। सरकार ने इसके लिए पेयजल कंपनी को निर्देश दिए हैं। सतलुज पेयजल योजना में शकरोड़ी पंपिंग स्टेशन पर ओजोनेशन प्लांट लगाया जाएगा। पेयजल कंपनी के महाप्रबंधक राजेश कश्यप ने कहा कि एक ही आवेदन आने के कारण ओजोनेशन प्रोजेक्ट का टेंडर रद्द हो गया है। जल्द ही दोबारा टेंडर आमंत्रित किए जाएंगे।
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यह है ओजोन तकनीक
ओजोनेशन एक बेहद शक्तिशाली ऑक्सीकरण तकनीक है जो पानी में मौजूद सभी हानिकारक सूक्ष्म जीवों को क्लोरीन की तुलना में तेजी से और प्रभावी ढंग से खत्म कर देती है। क्लोरीनेशन तकनीक में कई बार ज्यादा क्लोरीन पानी में मिलने से सेहत को नुकसान पहुंचता है। ओजोन तकनीक में ऐसा कोई खतरा नहीं रहेगा।
सतलुज से मिल रहा 20 एमएलडी तक पानी
शिमला शहर को सतलुज नदी से इन दिनों 20 एमएलडी तक पानी की आपूर्ति मिल रही है। यह पानी संजौली टैंक से पूरे शहर में सप्लाई किया जा रहा है। सभी छह पेयजल योजनाओं से शिमला शहर को 50 एमएलडी पानी की आपूर्ति दी जा रही है। एजीएम दिनेश भारद्वाज ने कहा कि शहर को पर्याप्त आपूर्ति दी जा रही है। इससे शहर में रोज पानी दिया जा रहा है।