सेब हिमाचल की प्रमुख बागवानी फसल
सेब हिमाचल प्रदेश की प्रमुख बागवानी फसल है, जो राज्य के कुल फल उत्पादन का लगभग 80 प्रतिशत और फलदार फसलों के अंतर्गत कुल क्षेत्रफल का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा है। हिमाचल देश का दूसरा सबसे बड़ा सेब उत्पादक राज्य है, जो राष्ट्र स्तर पर सेब उत्पादन में लगभग 22 प्रतिशत और सेब बागवानी के क्षेत्रफल में लगभग 37 प्रतिशत का योगदान देता है। शिमला, प्रदेश का प्रमुख सेब उत्पादक जिला है, जिसका राज्य के कुल उत्पादन में लगभग 55 प्रतिशत योगदान है। इसके बाद कुल्लू, किन्नौर और मंडी जिले आते हैं। एचपीएमआईएस पोर्टल पर बागवान स्वयं पंजीकरण कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त कॉमन सर्विस सेंटर/लोक मित्र केंद्रों अथवा ग्राम पंचायतों की सहायता से भी पंजीकरण करवा सकते हैं। शिमला जिले में पंजीकरण की सुविधा प्रदान करने के लिए 681 लोक मित्र केंद्र उपलब्ध हैं।
डिजिटल प्रणाली से भुगतान प्रक्रिया
डिजिटल प्रणाली के माध्यम से भुगतान प्रक्रिया को भी सरल बनाया गया है। पंजीकरण के बाद बागवानों को सेब की फसल निर्धारित सेब संग्रहण केंद्र पर लानी होगी। मंडी मध्यस्थता योजना के तहत स्वीकृत की गई सेब फसल की मात्रा एचपीएमआईएस में डिजिटल रूप से दर्ज की जाएगी। इसकी रसीद भी जारी की जाएगी। रसीद की एक प्रति बागवान को उसके पंजीकृत मोबाइल नंबर/अकाउंट पर उपलब्ध करवाई जाएगी। पात्र एमआईएस भुगतान का सत्यापन और योजना की निर्धारित शर्तों की पूर्ति के बाद प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) के माध्यम से सीधे बागवान के पंजीकृत बैंक खाते में हस्तांतरित किया जाएगा। बागवानों को यह सुनिश्चित करना होगा कि एचपीएमआईएस में उनका मोबाइल नंबर और बैंक खाते का विवरण सही दर्ज हो।
रिकॉर्ड और रसीदें जमा करवाने के लिए नहीं काटने पड़ेंगे कार्यालयों के चक्कर
डिजिटलीकरण से बागवानों को रिकॉर्ड और रसीदें जमा करवाने के लिए बार-बार एचपीएमसी और हिमफेड के कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। इसके अतिरिक्त एचपीएमसी के पराला (शिमला), परवाणू (सोलन) और जड़ोल (मंडी) स्थित प्रसंस्करण संयंत्रों में सेब की खरीद, परिवहन और प्रसंस्करण की रियल टाइम निगरानी भी संभव हुई है। रसीद, चालान, रिपोर्ट और रजिस्टर डिजिटल रूप से तैयार होने से पूरी प्रक्रिया अधिक सुव्यवस्थित हुई है और खरीदे गए सेब के शीघ्र निपटान में भी सुविधा मिली है। सरकार की ओर से बागवानों को परामर्श दिया गया है कि वे शीघ्र एचपीएमआईएस पर अपना पंजीकरण करवाएं। साथ ही मोबाइल नम्बर और बैंक खाते का विवरण अपडेट रखें तथा सेब केवल निर्धारित सेब संग्रहण केंद्र पर ही जमा करवाएं। बागवान डिजिटल रूप से जारी रसीद को अपने रिकॉर्ड के लिए सुरक्षित रखें। पंजीकरण, खरीद या भुगतान से संबंधित किसी भी तरह की दिक्कत होने पर सेब संग्रहण केंद्र, एचपीएमसी, हिमफेड, लोक मित्र केंद्र या ग्राम पंचायत से सहायता प्राप्त की जा सकती है।
बागवानी अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने को विशेष प्राथमिकता: मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि प्रदेश सरकार ने बागवानों के हितों की रक्षा करने तथा राज्य की बागवानी अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने को विशेष प्राथमिकता दी है। मंडी मध्यस्थता योजना बाजार में सेब की अधिक आवक और बाजार में मंदी के समय बागवानों को राहत प्रदान करती है, मूल्यवर्धन को बढ़ावा देती है तथा निम्न गुणवत्ता वाले फलों की खुले बाजार में आवक को नियंत्रित करने में भी मदद करती है। उन्होंने कहा कि मंडी मध्यस्थता योजना को बाजार में मंदी के दौरान सेब बागवानों को समय पर सहायता प्रदान करने और सेब के निस्तारण के लिए एक सुनिश्चित माध्यम उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि एमआईएस के माध्यम से खरीदे गए सेब के प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन में भी मदद मिलेगी।
बागवानी क्षेत्र को मजबूत करना राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में: सीएम
उन्होंने कहा कि बागवानों के हितों की रक्षा करना और बागवानी क्षेत्र को मजबूत करना राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में निरंतर शामिल रहेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि एमआईएस 2026-27 का डिजिटलीकरण योजना को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और बागवानों के अनुकूल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि एकमुश्त पंजीकरण, डिजिटल रसीद, रियल टाइम निगरानी और डीबीटी जैसी सुविधाओं से प्रक्रियागत दिक्कतें कम होंगी और भुगतान सीधे बागवानों के बैंक खातों में समय पर हस्तांतरित करने में सुविधा होगी। उन्होंने सेब उत्पादकों से एचपीएमआईएस पर पंजीकरण करवाने, निर्धारित संग्रहण केंद्र का उपयोग करने तथा योजना का लाभ सुचारू रूप से प्राप्त करने के लिए अपने पंजीकरण और बैंक विवरण को अपडेट रखने का आग्रह किया।