नियमितीकरण की आस लगाए आउटसोर्स कर्मचारियों को सरकार की नीति से बड़ा झटका लगा है। वित्त विभाग की ओर से जारी नीतिगत दिशा-निर्देशों में उनकी सेवा-शर्तों में किए गए आंशिक बदलाव उन्हें मंजूर नहीं हैं। सरकार पर वादा कर मुकरने का आरोप लगा रहा आउटसोर्स कर्मचारी महासंघ सोमवार से सड़कों पर उतरेगा।
3 जुलाई से 72 घंटे का क्रमिक धरना-प्रदर्शन कर सरकार को अपनी मांगों पर पुनर्विचार करने पर सोचने को मजबूर किया जाएगा। जिला मुख्यालयों के साथ शिमला सचिवालय के बाहर भी कर्मचारी धरना देंगे।
महासंघ ने साफ कर दिया है कि जब तक सरकार उनकी वेतनवृद्धि से लेकर नियमितीकरण की प्रक्रिया को हामी नहीं भरती, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा।
सरकारी विभागों, निगमों और बोर्डों में लगभग 35 हजार आउटसोर्स कर्मचारी तैनात हैं। आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए सरकार ने शनिवार को नीतिगत दिशा-निर्देश जारी किए। वित्त विभाग ने आउटसोर्स कर्मियों की तैनाती और देय लाभों के लिए अन्य विभागों के लिए पालिसी बनाई है।
नियमितीकरण से पहले ही मुकर चुकी सरकार की ताजा नीति में उनके मानदेय वृद्धि पर भी साफ तस्वीर नहीं है। इसी के चलते आउटसोर्स कर्मचारी महासंघ ने विरोध का झंडा बुलंद कर लिया है।
महासंघ का कहना है कि चार माह तक मंथन के बाद सरकार ने नियमितीकरण की प्रक्रिया पर हाथ खड़े कर जो नीति तैयार की है, उसमें कर्मचारियों के हित सुरक्षित नहीं रखे गए हैं।
महासचिव विनोद कुमार ने बताया कि कैबिनेट बैठक में पॉलिसी के नाम पर भद्दा मजाक उससे भी ज्यादा जारी नीति के प्रावधानों से हुआ है। सरकार कर्मचारियों को कंपनियों के चंगुल से नहीं निकाल रही है।