ऐसे में जब कोई महिला ऐसे बच्चे को जन्म देती थी तो यह पता लगाना मुश्किल होता था कि उसके सुनने की क्षमता कितनी है। जब वह बड़ा होता था तो पता चलता था कि उसकी सुनने की क्षमता कम है। अब स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिला अस्पतालों को ओटअकौस्तिक मशीनें उपलब्ध करवा दी हैं।
इस मशीन को बच्चों को लगाकर देखा जाएगा कि उसकी सुनने की क्षमता सही है या नहीं, जैसे ही मशीन को लगाया जाएगा तो मशीन बच्चे के स्वस्थ होने पर पास लिखकर देगी। अगर कोई कमी पाई गई तो रेफर लिखकर सचेत करेगी।
उधर, शिशु रोग विशेषज्ञ डॉक्टर सतीश शर्मा का कहना है कि बिलासपुर सहित अन्य जिलों के मुख्य अस्पतालों को मशीन दी गई है। इससे पहले शिमला या चंडीगढ़ ही नवजात बच्चों के बहरेपन का पता लग पाता था।