दरअसल, पिछले साल 23 जुलाई से चल रही सीबीआई जांच की रफ्तार पर लगातार सवाल उठ रहे थे। हाईकोर्ट कई बार जांच टीम को फटकार लगा चुका है, लेकिन टीम वैज्ञानिक आधार वाली छानबीन को अपनी ही रफ्तार से करने में जुटी रही।
टीम ने पूछताछ और मुखबिरों की सूचना के आधार पर घटना की कहानी तो पता कर ली, लेकिन बिना वैज्ञानिक आधार, सबूतों के आरोपियों पर वह हाथ डालने से बचती रही।
सूत्रों का कहना है कि सीबीआई इस बात को लेकर आश्वस्त होना चाह रही है कि पहले उसके हाथ हर वह पुख्ता सबूत लग जाए, जिससे कोर्ट में आरोपी का बचना संभव न हो। इसी काम को पूरा करने में उसकी कई टीमें लगी हुई हैं।
हाल ही में टीम को डेंचर और मोबाइल लोकेशन की रिपोर्ट मिली थी, जिसमें आरोपी चिह्नित करने में काफी मदद मिली। इन्हीं रिपोर्टों को फिर से अंतिम जांच के लिए भेजा गया था, जिसके बाद एक आरोपी की गिरफ्तारी की गई है।
गुड़िया मामले में सीबीआई ने आखिर किसे गिरफ्तार किया है, यह जानने के लिए लोग रविवार को दिन भर अपने स्तर पर जुट गए हैं। महासू और बानकुफर के आसपास इसी शख्स का पता करने में लोग दिनभर एक-दूसरे से पूछते रहे।
कोटखाई में गुड़िया मामला सामने आने के बाद से पूरे इलाके में लोग असली दोषियों के नाम जानने को बेताब हैं। शुरुआती विरोध और फिर पुलिस, सिट व क्राइम ब्रांच के बाद सीबीआई की जांच की अपडेट लोग लगातार लेते रहे हैं। अब जबकि सीबीआई ने नौ महीने की जांच के बाद पहली गिरफ्तारी की है तो लोगों की आरोपी को जानने की बेताबी और बढ़ गई है।
गुड़िया मामले में हिमाचल पुलिस की ओर से पूर्व में आरोपी बनाए गए राजू व सुभाष इन दिनों बागवान के बगीचे में सेब पर एंटी हेलनेट डालकर मजदूरी कर रहे हैं।
पुलिस ने पूछताछ के लिए जिन्हें पहले हिरासत में ले रखा था, वे भी अब अपने घरों में हैं। पहले से ग्रामीणों के शक के दायरे में रहे कई स्थानीय लोग भी गांव में ही पाए गए। ऐसे में लोग एक-दूसरे को पूछते नजर आए कि फिर सीबीआई ने आखिरकार किसे गिरफ्तार किया है।