मॉडल का दूसरा महत्वपूर्ण पक्ष आर्थिक कार्रवाई है। पिट-एनडीपीएस एक्ट के तहत 174 आरोपियों को हिरासत में लिया गया है। साथ ही नशा तस्करों से जुड़ी लगभग 51 करोड़ रुपये की अवैध संपत्तियां जब्त की गई हैं। पुलिस और जांच एजेंसियों ने 700 से अधिक मामलों की जांच की, जिनमें करीब 300 मामलों को आर्थिक जांच और संपत्ति जब्ती के लिए उपयुक्त पाया गया। एंटी चिट्टा अभियान केवल कानूनी कार्रवाई तक सीमित नहीं रखा गया है। नशे की लत से प्रभावित युवाओं के पुनर्वास पर भी फोकस किया जा रहा है। प्रदेश में नशामुक्ति एवं पुनर्वास केंद्रों के मानकीकरण की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। सिरमौर जिले के कोटला बड़ोग में आधुनिक पुनर्वास केंद्र स्थापित किया जा रहा है, जबकि शिमला के मशोबरा और कांगड़ा के टांडा मेडिकल कॉलेज में भी नए पुनर्वास केंद्र शुरू करने की तैयारी है।