अपनी खूबसूरती और महंगे दाम के कारण विश्व की टॉप टेन रैंकिंग में शुमार ओरिएंटल लिली फूल के बल्ब (पौध) अब हिमाचल के थुनाग स्थित बागवानी अनुसंधान और विस्तार केंद्र में तैयार होंगे। वर्तमान में खेती के लिए यह बल्ब हॉलैंड से मंगवाए जाते हैं। जबकि देश में उत्तराखंड के अलावा पूर्वी हिमालय दार्जिलिंग, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश में कुछ निजी फ्लावरिस्ट भी बल्ब तैयार कर रहे हैं, लेकिन हिमाचल में पहली बार सरकारी क्षेत्र में यह वैरायटी फूलों की खेती से जुड़े आम लोगों के लिए भी तैयार होगी।
नौणी विवि में पुष्प एवं स्थल सौंदर्य विभाग ने इस सुंदर प्रजाति के टिश्यू कल्चर तैयार करने में सफलता पाई है। वहीं बल्ब से बल्ब (पौध) तैयार करने की विधि भी ईजाद कर ली है। अब मंडी जिला के सराज की मिट्टी और आबोहवा को लिलियम के लिए सबसे उपयुक्त मानते हुए बड़े पैमाने पर इस पर काम किया जाएगा। इससे हिमाचल में फूलों की खेती को बढ़ावा दिया जा सकेगा। थुनाग हॉर्टिकल्चर कॉलेज में इस फूल की डस्ट टेस्टिंग का काम शुरू हो गया है, जिसमें फूल की विशेषताओं पर शोध चल रहा है।