फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Solan News: अस्पतालों में पीएसए प्लांट के तकनीकी कर्मचारियों को निकालने के दिए आदेश

Fri, 07 Apr 2023 11:39 AM IST
Krishan Singh आदित्य सोफत, संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन

सार

कोरोना काल के दौरान अस्पतालों में ऑक्सीजन की किल्लत को खत्म करने के लिए पीएम केयर के जरिये पीएसए प्लांट प्रदेशभर में लगाए गए थे। इसी के साथ इन ऑक्सीजन प्लांट को चलाने के लिए आउटसोर्स पर कर्मियों की तैनाती की गई थी।
विज्ञापन
कर्मचारी निकाले(सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

प्रदेश में बढ़ते कोरोना मामलों के बीच अस्पतालों में लगे पीएसए (प्रेशर स्विंग एब्जार्बप्शन) के करीब 102 तकनीकी कर्मचारियों को निकालने की प्रक्रिया जारी है। इनमें से जिला सोलन के अस्पतालों में तैनात 30 कर्मचारी शामिल हैं। सरकार ने इन्हें निकालने के आदेश जारी कर दिए हैं। इन सभी कर्मचारियों पर अब बेरोजगारी की तलवार लटक गई है। कोरोना काल के दौरान अस्पतालों में ऑक्सीजन की किल्लत को खत्म करने के लिए पीएम केयर के जरिये पीएसए प्लांट प्रदेशभर में लगाए गए थे। इसी के साथ इन ऑक्सीजन प्लांट को चलाने के लिए आउटसोर्स पर कर्मियों की तैनाती की गई थी। लेकिन, सरकार ने हाल ही में कई कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाना शुरू कर दिया है। इसके बाद से प्रदेश में कई अस्पतालों के पीएसए प्लांट बंद होना शुरू हो गए हैं। 

विज्ञापन


जिला सोलन में क्षेत्रीय अस्पताल का पीएसए प्लांट कर्मचारियों को बाहर करने के बाद बंद हो गया है। वहीं, कर्मचारियों को सरकार की ओर से सितंबर से कोई मानदेय नहीं मिला है। ऐसे में यह कर्मचारी बिना मानदेय के कार्य कर रहे थे। हालांकि, इन कर्मचारियों की रोजाना हाजिरी लगाई जा रही थी। प्रदेशभर में करोड़ों रुपये खर्च कर ऑक्सीजन प्लांट लगाए गए थे। इन प्लांटों से न केवल कोरोना पीड़ितों को फायदा मिल रहा था, बल्कि अन्य सांस संबंधी मरीजों को भी आसानी हो रही थी। वहीं, ऑक्सीजन सिलिंडरों की खपत भी अस्पतालों में कम हो गई थी। आउटसोर्स पर लगे कर्मचारी प्लांट को लगभग 20 से 24 घंटे तक चला रहे थे। लेकिन, इन कर्मचारियों को निकालने के बाद प्लांट में ताला लटक गया है और अब मरीजों को पीएसए प्लांट का कोई फायदा नहीं मिल पा रहा है। कई अस्पतालों में पीएसए प्लांट को चलाने के लिए स्टाफ ही नहीं है। ऐसे में मरीजों को सिलिंडर के जरिये ही ऑक्सीजन मिलेगी। इससे अस्पतालों का खर्च और अधिक बढ़ जाएगा। 

कोरोना के दौरान आपातस्थिति में रखे गए कर्मचारियों की सेवाएं अब नहीं ली जा रही हैं। हालांकि, इनके बारे में उच्चाधिकारी को लिखा गया था और इनकी सेवा के विस्तार के बारे में पूछा गया है। उच्चाधिकारियों की ओर से कोई जवाब नहीं आया है। इसके बाद इन कर्मचारियों की सेवा लेनी बंद कर दी हैं और इन्हें भी अवगत करवा दिया है। जैसे ही उच्चाधिकारियों से कोई जवाब आता है, वैसे ही आगामी स्थिति के बारे में इन कर्मचारियों को बता दिया जाएगा।

विज्ञापन

-डॉ. राजन उप्पल मुख्य चिकित्सा अधिकारी, सोलन।

 

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें