चार हफ्ते की भीतर हटाना होगा अवैध ढांचा संवाद न्यूज एजेंसी शिमला। जिला अदालत ने नगर निगम आयुक्त कोर्ट के फैसले पर मुहर लगाते हुए तारादेवी बस अड्डे के पास किए अवैध निर्माण और सरकारी भूमि पर किए कब्जे को हटाने का आदेश दिया है। अदालत ने इस मामले में राहत पाने के लिए दायर अपील को खारिज कर दिया है।
जिला न्यायाधीश भुवनेश अवस्थी की अदालत ने स्पष्ट किया कि बिना पूर्व अनुमति के पुराना ढांचा बताकर एमएस स्टील और एमएस शीट से नया निर्माण करना तथा सरकारी जमीन (खसरा नंबर 482) पर कब्जा करना अवैध है। अदालत ने अपीलकर्ता को चार सप्ताह के भीतर अवैध ढांचा खुद गिराने का आदेश दिया है, ऐसा न करने पर नगर निगम अपने खर्च पर इसे हटाएगा और बिजली-पानी के कनेक्शन तुरंत काट दिए जाएंगे। तारादेवी बस स्टैंड निवासी हरदेव दत्त शर्मा ने नगर निगम कमिश्नर द्वारा 28 फरवरी 2026 को दिए डिमोलिशन ऑर्डर (गिराने का आदेश) को जिला अदालत में चुनौती दी थी। अपीलकर्ता का तर्क था कि उसने कोई नया निर्माण नहीं किया बल्कि भारी बर्फबारी और बारिश से अपने मकान को बचाने के लिए केवल लोहे के एंगल और सीजी शीट लगाकर पुरानी छत की मरम्मत की थी।
अदालत ने कहा कि अपीलकर्ता का अनुमति के लिए दिया आवेदन अधूरा था जिस पर नगर निगम ने 4 जनवरी 2024 को ही ततिमा, जमाबंदी और अनापत्ति प्रमाण पत्र जैसी कमियों को पूरा करने को कहा था। कमियां दूर किए बिना डीम्ड सेंक्शन का लाभ नहीं उठाया जा सकता। अदालत ने माना कि अपीलकर्ता को सुनवाई का पूरा अवसर दिया था, लेकिन वह अंतिम तारीखों पर अदालत में पेश नहीं हुआ जिसके बाद कमिश्नर ने उचित प्रक्रिया अपनाई। नगर निगम कमिश्नर के 28 फरवरी 2026 के आदेश को बरकरार रखते हुए अदालत ने चार सप्ताह के भीतर अवैध निर्माण हटाने के निर्देश दिए हैं।