इसकी जैसे ही जानकारी मिली, इसे तुरंत हटाने के निर्देश दे दिए गए। उन्होंने कहा कि इस मामले की जांच की जाएगी और इस साइट चढ़ाने वाले जिम्मेवार लोगों पर कार्रवाई होगी।
विपक्ष के वाकआउट करने के बाद मुख्यमंत्री ने सदन को अवगत कराया कि राज्य सरकार की टूरिज्म यूनिट बेचने की कोई मंशा नहीं है। उन्होंने विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि संपत्तियां हमने नहीं, बल्कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में बेची गईं।
वाइल्ड फ्लावर हॉल जो टूरिज्म की प्राइम प्रापर्टी थी। कांग्रेस ने इसे सत्ता में रहते हुए वर्ष 1995 में बेच दिया। राज्य सरकार को आज तक इससे एक भी पैसा नहीं मिला। कुल्लू के एंगलो कटराई होटल को भी निजी हाथों में दे दिया गया।
पूर्व कांग्रेस सरकार ने विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लगने से ठीक पहले एचपी सीलिंग ऑन लैंड होल्डिंग एक्ट-1972 के तहत चाय बगानों के चेंज ऑफ लैंड यूज किए जाने का निर्णय लिया। हालांकि हमारी सरकार ने हिमाचल के हितों को ध्यान में रखते हुए इसे आगे नहीं बढ़ने दिया।