फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

करोड़ों खर्च होने की फिक्र न सत्तापक्ष को, न विपक्ष को

Tue, 11 Dec 2018 05:00 AM IST
सुनील चड्ढा, अमर उजाला, तपोवन (कांगड़ा)
विज्ञापन
विज्ञापन

तपोवन में शीतकालीन सत्र के दौरान हर दिन होने वाले संभावित एक करोड़ रुपये के खर्चे की फिक्र न तो सत्तापक्ष को है न ही विपक्ष को। रचनात्मक सहयोग से सदन को चलाने की बात करने वाला विपक्ष शीत सत्र के पहले दिन मात्र 12 मिनट विधानसभा के सदन में टिका।

विज्ञापन


12 मिनट भी सिर्फ नारेबाजी और फिर वाकआउट हुआ। सत्र से पहले जयराम सरकार को न घेरने की बात कहने वाले वीरभद्र सिंह भी 12 मिनट के भीतर ही मुकेश अग्निहोत्री और अन्य कांग्रेस सदस्यों के साथ विरोध की आवाज बुलंद करते नजर आए।

सरकार पर लगाए आरोपों को लेकर विपक्ष ने सदन में कोई भी नोटिस नहीं दिया था। विस अध्यक्ष विपक्ष को कहते रहे कि आप नोटिस दीजिए, फिर आपके आरापों पर चर्चा जरूर होगी।
विज्ञापन


लेकिन, सदन में जनता के लिए बेहद महत्वपूर्ण प्रश्नकाल के बीच 12 मिनट तक हंगामा चलता रहा। भाजपा सहित कांग्रेस के विधायकों ने भी सदन में जनहित के मुद्दों को लेकर कई प्रश्न सदन में लगाए थे।

विज्ञापन

सुक्खू और आशा पहले दिन नहीं आए 

लेकिन, जब विधानसभा अध्यक्ष ने प्रश्न के साथ कांग्रेस विधायकों का नाम पुकारा तो वे सदन में मौजूद नहीं थे। विपक्ष के सदस्य वाकआउट करने के बाद दोबारा सदन के भीतर नहीं आए।

नेता प्रतिपक्ष अपने सदस्यों के साथ सदन के बाहर नेता प्रतिपक्ष के कमरे में बैठ कर सदन की कार्यवाही सुनते और अगले दिन की रणनीति बनाते रहे। कुलमिलाकर 12 मिनट के हंगामे के आगे शीत सत्र के एक दिन के लिए संभावित 1 करोड़ रुपये का खर्चा और जनहित का प्रश्नकाल बौना पड़ गया।  

पिछले कुछ समय से हर राजनीतिक मंच पर कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष सुखविंद्र सुक्खू और पूर्व सीएम वीरभद्र सिंह के बीच दिख रही तल्खी का असर शीत सत्र के पहले दिन नहीं पड़ा। सदन में पहले दिन सुखविंद्र सुक्खू नहीं आए। आशा कुमारी भी सदन में मौजूद नहीं थी।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें