सूडान से सुरक्षित घर लौटे दीपक ने बताया कि चार जगह सेना ने बस को रोका लेकिन भारतीय पासपोर्ट देखने पर हंसते हुए वेलकम कहा। ये जवान उसी सेना का हिस्सा थे, जिन्होंने एक दिन पहले अमेरिका के लोगों के मोबाइल से लेकर खाने का सामान लूट लिया था।
ऑपरेशन कावेरी से तहत हमीरपुर जिले के पनसाई निवासी दीपक अग्निहोत्री सूडान से सुरक्षित घर लौट आए हैं। एमबीए के बाद पांच साल से सूडान के खारतूम के साथ सटे रियाद में एक भारतीय कंपनी में अकाउंटेंट का काम करने वाले दीपक ने कहा कि तिरंगे की ऊंची शान की वजह से हमारा बाल भी बांका नहीं हुआ। उन्होंने बताया कि सूडान छोड़कर लौट रहे अमेरिकियों को लूटने की खबर मिली तो हम लोग सोचने लगे कि अब क्या होगा।
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लेकिन जब हम निकले तो भारत के पासपोर्ट को देखकर ही अमेरिकियों को लूटने वाले हमारा इस्तकबाल करने लगे। यह देखकर जहां घर लौटने की खुशी दोगुनी बढ़ गई, वहीं भारत की ताकत का एहसास भी हुआ। 28 वर्षीय दीपक ने कहा कि सूडान में 15 अप्रैल से सत्ता संघर्ष शुरू हुआ। 23 अप्रैल तक एक भवन के मध्य में बने बड़े हॉल में सात लोग ठहरे थे। हॉल के चारों तरफ कमरे थे इसलिए गोलियों से बचने के मध्य सुरक्षित ठिकाना था। खाना करीब 15 दिन का था। लेकिन घर जाने की चिंता से भूख नहीं लगती थी।
इसी बीच भारत में पीएम मोदी की उच्चस्तरीय बैठक के बाद सूडान में भारतीय दूतावास के अधिकारियों ने हमारे व्हाट्सएप ग्रुप पर मैसेज किया कि अपनी डिटेल भेजें। अगले दिन हमें पोर्ट सूडान पहुंचने के लिए कहा गया। लेकिन गोलीबारी और बमों के बीच पहुंचना कठिन था। ग्रुप में जुड़े करीब 50 भारतीयों ने हिम्मत जुटाकर एक बस किराये पर ली और 23 अप्रैल को एयरपोर्ट के लिए निकल पड़े। 14 घंटे के सफर में करीब चार जगह सेना ने बस को रोका लेकिन भारतीय पासपोर्ट देखने पर हंसते हुए वेलकम कहा।
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ये जवान उसी सेना का हिस्सा थे, जिन्होंने एक दिन पहले अमेरिका के लोगों के मोबाइल से लेकर खाने का सामान लूट लिया था। रात करीब दस बजे भारतीय दूतावास पोर्ट सूडान पहुंचे। हमारे ग्रुप में महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग भी थे। हर किसी के लिए यहां खाना बना हुआ था। फिर अगले दिन बंदरगाह से सऊदी अरब के जेदा पहुंचे और जेदा से दिल्ली के लिए पहले से तैयार जहाज में स्वदेश लौटे।