शिमला। आईजीएमसी में रेजिडेंट डॉक्टरों की हड़ताल रुकने के बाद भी मरीजों के ऑपरेशन पेंडिंग चल रहे हैं। ऑपरेशन न हो पाने के कारण मरीज काफी परेशान हैं। आलम यह है कि मरीज के तीमारदार रोजाना अस्पतालों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन डॉक्टरों से ऑपरेशन करने को लेकर संतोषजनक जवाब न मिल पाने के कारण उनकी परेशानियां बढ़ गई हैं।
आईजीएमसी ने बीते सप्ताह रेजिडेंट डॉक्टर हड़ताल पर चले गए थे। ऐसे में रुटीन के ऑपरेशन बंद कर दिए गए थे। लिहाजा मरीजों को यह कहा गया था कि डॉक्टर के आने के बाद ऑपरेशन सुचारु रूप से किए जाएंगे। लेकिन अब क्योंकि रेजिडेंट डॉक्टर काम पर लौट आए हैं, बावजूद इसके 8 से 9 दिसंबर के बीच रखे गए मरीजों के ऑपरेशन अभी लटके पड़े हैं।
करसोग के मीनू ने बताया कि उनकी पत्नी का गॉल ब्लैडर स्टोन का ऑपरेशन रखा गया था। लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें ऑपरेशन करने से मना कर दिया था। कहा था कि उन्हें कॉल करके बुलाया जाएगा। लेकिन चार दिन बीतने के बाद भी उन्हें ऑपरेशन की तारीख नहीं मिल पाई है। इसके अलावा कुल्लू व बिलासपुर से आए मरीजों की भी सर्जरी रखी गई थी। लेकिन वह भी नई तारीख के इंतजार में अब घर लौट आए हैं। मरीजों ने प्रबंधन से मांग की है कि रुटीन में चल रहे ऑपरेशन के साथ-साथ जिन मरीजों को ऑपरेशन पेंडिंग हैं, उनके भी एक-एक या दो-दो करके ऑपरेशन करवाए जाएं, जिससे कि उन्हें दिक्कतें पेश न आए।
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रेजिडेंट ने चेताया : मांग पूरी न हुई तो इस बार इमरजेंसी सेवा भी होगी बंद
इधर, रेजिडेंट डॉक्टर ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री से आश्वासन मिलने के बाद हड़ताल को एक हफ्ते के लिए टाला है। ऐसे में उनकी मांग 16 दिसंबर तक पूरी नहीं हुई तो आगे भी हड़ताल जारी रख सकते हैं। वहीं यह भी चेतावनी दी है कि वह इमरजेंसी सेवाएं भी बंद कर देंगे। ऐसे में अगर यह ऑपरेशन नहीं होते हैं तो मरीजों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा।
आईजीएमसी के प्रशासनिक अधिकारी डॉ. राहुल गुप्ता ने बताया कि हड़ताल के दौरान पेंडिंग पड़े मरीजों के ऑपरेशन को विभागीय चिकित्सक रूटीन ऑपरेशन के साथ एडजस्ट कर रहे हैं।