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कॉलेजों के लिए आफत बनी सरकार की ये शर्त?

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हिमाचल की युवा पीढ़ी में इंजीनियरिंग का क्रेज लगातार कम हो रहा है। न तो दसवीं के बाद के डिप्लोमा में छात्र मिल रहे हैं और न ही जमा दो के बाद के डिग्री कोर्सों में।
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इसकी सबसे ज्यादा मार प्राइवेट इंजीनियरिंग और पोलीटेक्निक कॉलेजों पर पड़ रही है। इस साल अभी काऊंसलिंग का पहला चरण पूरा हुआ है। लेकिन इसमें महज 1 फीसदी ही सीटें भर पाई हैं। 99 फीसदी सीटें अभी खाली हैं।

प्रदेश में इस समय 17 प्राइवेट इंजीनियरिंग कॉलेज एवं 23 पोलीटेक्निक कॉलेज हैं। इनमें कुल 7550 सीटें हैं। इनमें से पहली काऊंसलिंग में केवल 92 सीटें भरी हैं।
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दसवीं के आधार पर भरी जा रही है सीटें

वहीं, डिप्लोमा सीटें 10वीं के बाद होने वाले पीएटी (पैट) से भरी जा रही हैं, जबकि डिग्री सीटों को जेईई के आधार पर भरा जा रहा है। इसके लिए काऊंसलिंग हमीरपुर तकनीकी विश्वविद्यालय करता है।

मगर अब तक विवि में केवल 452 छात्रों के ही आवेदन पहुंचे हैं। इस बार पैट परीक्षा 14 हजार छात्रों ने दी है। लेकिन दो सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेजों में एडमिशन के बाद प्राइवेट कॉलेजों की ओर कोई रुख नहीं कर रहा है।

सीटें खाली रहने से परेशान निजी इंजीनियरिंग कॉलेजों के संचालक वीरवार को तकनीकी शिक्षा मंत्री जीएस बाली से सचिवालय में मिले। इन्होंने एडमिशन नियमों में छूट देने का मसला उठाया।
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बाली ने कहा, ध्यान में है मामला

प्राइवेट कॉलेज टेक्निकल एसोसिएशन के प्रधान रजनीश बंसल ने बताया कि एडमिशन पर सरकार की शर्तों की मार पड़ रही है। शर्त है कि जो छात्र पैट में बैठा है, उसके अंक चाहे 0 हो, लेकिन वह प्रवेश के लिए पात्र है। जिसके 10वीं में 80 फीसदी अंक हैं लेकिन वह पैट में नहीं बैठा है, तो एडमिशन नहीं ले सकता।

वहीं, तकनीकी शिक्षा मंत्री जीएस बाली ने कहा कि सरकार के ध्यान में सारा मामला है। प्राइवेट कॉलेजों ने उनसे मिलकर अपनी बात रखी है। प्रधान सचिव तकनीकी शिक्षा के. संजयमूर्ति से इस पर रिपोर्ट मांगी है।
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