सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि प्रवेश पूरी तरह मेरिट के आधार पर होगा। पात्रता की पुष्टि सक्षम अधिकारी की ओर से की जाएगी। यह प्रावधान कुल स्वीकृत सीटों की संख्या बढ़ाए बिना और संस्थानों पर किसी अतिरिक्त ढांचागत या वित्तीय बोझ डाले बिना लागू किया जाएगा। मौजूदा संसाधनों के बेहतर उपयोग के माध्यम से सामाजिक समावेश को बढ़ावा देने के लिए यह फैसला लिया गया है। राज्य सरकार की यह पहल समाज के वंचित वर्गों को सशक्त बनाने की व्यापक दृष्टि के अनुरूप सभी कल्याणकारी प्रयासों को सशक्त बनाती है।
अन्य कल्याणकारी योजनाओं, विशेष रूप से मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना के तहत जिसमें अनाथ बच्चों को चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट का दर्जा दिया गया है, को पुष्ट करती है। इस योजना में सरकार उनके समग्र पालन-पोषण और शिक्षा सहित 27 वर्ष की आयु तक उनकी देख-रेख कल्याण की जिम्मेदारी लेती है। हिमाचल प्रदेश देश का पहला राज्य है, जिसने इस विषय में कानून बनाकर अनाथ बच्चों को कानूनी अधिकार प्रदान किए हैं।