फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

तबादलों और स्वागत समारोहों में बीता जयराम सरकार का ज्यादातर समय

Sat, 27 Jan 2018 10:37 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
विज्ञापन
विज्ञापन

हिमाचल की भाजपा सरकार का एक माह कार्यकाल का अधिकतर समय तबादलों और स्वागत समारोहों में बीता। राजधानी के रिज मैदान पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह समेत 10 प्रदेशों के मुख्यमंत्री-उपमुख्यमंत्रियों की मौजूदगी में जयराम ठाकुर मंत्रिमंडल का भव्य शपथ ग्रहण समारोह हुआ। 

विज्ञापन


दो दशक बाद प्रदेश को मिले नए नेतृत्व से जनता बड़े फैसलों की आस लगाए हुए है। जयराम ने एक सधी हुई शुरुआत की। कुछ बड़े फैसले भी लिए गए, लेकिन सरकार पर स्वागत के गुलदस्तों और फूलमालाओं का बोझ अधिक दिखा। 

जयराम ने कई बार गुलदस्ते नहीं देने की अपील की, लेकिन अमल नहीं हुआ। प्रदेश में विकास को रफ्तार देने के लिए सौ दिन के एजेंडे के पहले तीस दिन स्वागत समारोह और प्रशासनिक फेरबदल में गुजर गए। धड़ाधड़ हुए तबादलों से अधिकारी जोश में कम पसोपेश में अधिक दिखे। 
विज्ञापन


बदले की भावना से काम नहीं करने का एलान कर चुके मुख्यमंत्री जयराम ने अपनी प्राथमिकताओं के हिसाब से अफसरशाही को फेंट डाला। हालांकि इस दौरान शीतकालीन सत्र करवाने के साथ तीन कैबिनेट बैठकों में लिए गए जनहित के कई फैसले उनके ‘गुड वर्क’ को दिखाते हैं।

मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने इस दिन संभाला कामकाज

मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने 27 जनवरी को कामकाज संभाला, लेकिन पुरानी परंपराओं से वे भी अछूते नहीं रहे। पहली कैबिनेट ने पिछली सरकार के किए तमाम सेवा विस्तार और पुनर्नियुक्तियां समाप्त कर दीं।

पूर्ववर्ती सरकार के 1 अप्रैल 2017 के बाद लिए फैसलों की समीक्षा के आदेश दिए। अपने सचिवालय में अधिकारियों की तैनाती कर दिल्ली रवाना हो गए। दिल्ली के बाद जयराम बिलासपुर और मंडी जिले के दौरे पर गए। इसके बाद जब भी वे शिमला पहुंचे सचिवालय के बाहर बधाई देने वालों का तांता लगा रहा।

इस बीच जयराम ने अपनी प्राथमिकताओं के हिसाब से मुख्य सचिव बदल कर नौकरशाही को संदेश दिया कि बड़े प्रशासनिक फेरबदल को तैयार रहें। एक जनवरी को उन्होंने अपने लिए सौ दिन का लक्ष्य तय किया।

लक्ष्य तय करने के बाद अधिकारी अपने कामकाज में जुटे ही थे कि प्रशासनिक फेरबदल का सिलसिला शुरू हुआ। सीएम ने पसंद के अफसरों को प्राथमिकताओं के हिसाब से बदला। शासन और फील्ड में तैनात अफसरशाही के जमकर तबादले हुए। तबादलों को लेकर सरकार थोड़ी जल्दबाजी में दिखी, जिससे गड़बड़ियां भी र्हुइं। 

मंत्रिमंडल गठन के बाद कैबिनेट ने की लोक लुभावने फैसले लेने की शुरुआत

 मंत्रिमंडल गठन के बाद कैबिनेट ने पूर्व सरकार के फैसलों को रिव्यू करने के साथ लोक लुभावने फैसले लेने की शुरुआत की। आबकारी पालिसी को निरस्त कर अपना सख्त संदेश देने की कोशिश हुई।

नई सरकार के तमाम प्रयासों के बीच अफसरों के तबादलों की आई बाढ़ के बीच सरकारी कामकाज की रफ्तार पर ब्रेक लग गई। कुछ फैसलों पर सरकार को रोल बैक करना पड़ा। 100 दिन का एजेंडा लेकर चली सरकार के पहले तीस दिन स्वागत समारोह और तबादलों में निकल गए।

हालांकि मुख्यमंत्री जयराम इसे धीमी शुरुआत नहीं मानते। उनका कहना है कि वे जल्दबाजी में नहीं हैं। दूसरी, स्वागत अभिनंदन का लंबा दौर अब थमने लगा है। सैकड़ों तबादलों के बाद अधिकारी खुद को सेटल करने में लगे हैं। मुख्यमंत्री का 28 जनवरी से कांगड़ा शीतकालीन प्रवास शुरू हो रहा है। अब जनता की नजर जयराम सरकार के अगले 70 दिनों पर रहेगी।

ऐसा गुजरा सरकार का एक माह

27 दिसंबर को जयराम मंत्रिमंडल ने शपथ ली, पहली कैबिनेट बैठक आयोजित
 28 दिसंबर को मुख्यंमत्री केंद्रीय नेतृत्व का आभार जताने दिल्ली रवाना
29 दिसंबर : मंत्रियों के विभागों का आवंटन
30 दिसंबर : मुख्य सचिव बदलने के साथ प्रशासनिक फेरबदल शुरू
31 दिसंबर : मुख्यमंत्री का सरकारी आवास में प्रवेश
1 जनवरी : मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सौ दिन का दिया लक्ष्य
2 जनवरी : दो दिवसीय बिलासपुर और मंडी दौरे पर निकले सीएम
4 जनवरी : कैबिनेट ने पूर्व सरकार के फैसलों की समीक्षा का निर्णय लिया
5 जनवरी : 10 डीसी समेत 32 आईएएस अफसरों के प्रभार बदले 
6 जनवरी : मुख्यमंत्री ने जन्मदिन पर गुलदस्तों, पांव छूने की परंपरा बंद करने को कहा
7 जनवरी : विधानसभा क्षेत्र सिराज में स्वागत समारोह के लिए गए मुख्यमंत्री 
8 जनवरी : शीतकालीन सत्र के लिए सरकार धर्मशाला रवाना हुई 
 9 जनवरी : शीतकालीन सत्र शुरू हुआ, विधायकों ने शपथ ली 
10 जनवरी:  विधानसभा अध्यक्ष का चयन, राज्यपाल का अभिभाषण, कैबिनेट आबकारी नीति को पलटा 
11 जनवरी : राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा में घिरी सरकार
12 जनवरी : अपने फैसले से पलटी सरकार, तीन और कर्मियों को दी पुनर्नियुक्ति
14 जनवरी : मकर संक्रांति पर मंडी जिले के तत्तापानी में धन्यवाद जनसभा
15 जनवरी : मुख्यमंत्री ने पीडब्ल्यूडी महकमे की समीक्षा की, काम की डेडलाइन तय
16 जनवरी : प्रदेश में रिकॉर्ड तबादले, 104 नौकरशाहों के प्रभार और स्थानांतरण हुए
17 जनवरी : मुख्यमंत्री दिल्ली रवाना, दो एडीजी और छह एसपी बदले 
18 जनवरी : दिल्ली में जीएसटी की बैठक में सीएम ने भाग लिया 
19 जनवरी : बागवानी विकास को न्यूजीलैंड से हुआ करार
20 जनवरी : दो दर्जन आईएएस, एचएएस और आईपीएच अफसर बदले
23 जनवरी : सूखे के हालात और कानून व्यवस्था सुधारने पर लिए फैसले
25 जनवरी : पूर्ण राज्यत्व दिवस पर आनी में आयोजित राज्य समारोह में शामिल हुए सीएम 

जयराम सरकार के बड़े फैसले

- सेवा विस्तार और पुनर्नियुक्तियों पर रोक
- वीरभद्र सरकार के अंतिम 6 माह के फैसलों की समीक्षा
- बुजुर्गों को मिलने वाली पेंशन की आयु 80 से 70 वर्ष की
- बीवरेज कार्पोरेशन भंग की, आबकारी नीति पर बैठाई जांच
- राजनीतिक आपराधिक मामलों को वापस लेने का निर्णय 
- कर्मचारियों को तीन फीसदी डीए देने का किया एलान
- रघुनाथ मंदिर का अधिग्रहण किया रद्द
- रिटायर्ड 1200 कानूनगो पटवारियों की रद्द पुनर्नियुक्ति की बहाल
- पूर्व सैनिक कोटे के कर्मचारियों का अधिकतम वेतन बढ़ाया
- अतिरिक्त और उपमहाधिवक्ताओं समेत 50 सरकारी वकीलों की छुट्टी
- शिमला, मंडी, धर्मशाला पुलिस रेंज में अपराध निगरानी को विशेष सेलों का गठन

कर्मचारियों और बुजुर्गों के लिए बड़े फैसले

हिमाचल सरकार ने कर्मचारियों और बुजुर्गों के हित में कई बडे़ फै सले लिए हैं। इससे प्रदेश के करीब पौने तीन लाख कर्मचारियों और लाखों बुजुर्गों के चेहरे खिल गए हैं। सत्ता में आते ही जयराम सरकार ने सेवा विस्तार और पुनर्नियुक्तियों पर रोक लगा दी है।

प्रदेश में कर्मचारियों का एक बड़ा वर्ग इस तरह की नियुक्तियों के खिलाफ रहा है। इस फैसले को युवा बेरोजगारों ने भी सराहा है। इससे अधिकारियों और कर्मचारियों की पदोन्नति के द्वार खुले रहेंगे तो युवा बेरोजगारों को भी इसका लाभ होगा।

पूर्व सैनिक कोटे के कर्मचारियों का अधिकतम वेतन बढ़ाकर भी सरकार ने उन्हें राहत दी। जयराम सरकार ने सत्ता में आते ही कर्मचारियों को तीन फीसदी डीए देने का एलान किया तो एक महीना पूरा होने पर पूर्ण राज्यत्व दिवस पर उनके लिए आठ फीसदी अंतरिम राहत की घोषणा की।

वीरभद्र सरकार के अंतिम छह माह के फैसलों की समीक्षा करने का भी उन्होंने एलान किया। बुजुर्गों को मिलने वाली पेंशन की आयु 80 से 70 वर्ष करने का फैसला भी लिया गया। सरकार ने बीवरेज कार्पोरेशन भंग कर आबकारी नीति पर जांच बैठाई है।

इसमें अनियमितताओं का मामला काफी पहले से उठाया जा रहा था। राजनीतिक और आपराधिक मामलों को वापस लेने का निर्णय लेकर भी सरकार ने कई अपनों को राहत पहुंचाई है। 

ये भी फैसले लिए 
 रघुनाथ मंदिर का अधिग्रहण किया रद्द, रिटायर्ड 1200 कानूनगो पटवारियों की रद्द पुनर्नियुक्ति की बहाल, अतिरिक्त और उपमहाधिवक्ताओं समेत 50 सरकारी वकीलों की छुट्टी, शिमला, मंडी, धर्मशाला पुलिस रेंज में अपराध निगरानी को विशेष सेलों का गठन,100 दिन का एजेंडा तय किया
विज्ञापन

विपक्ष के हमलों ने सरकार को पहले ही सत्र में कर दिया असहज

तेरहवीं विधानसभा के पहले सत्र में विपक्ष की रणनीति के आगे जयराम सरकार कई मुद्दों पर असहज दिखी। सत्र में राज्यपाल के अभिभाषण पर हुई चर्चा में विपक्ष के तेवर कड़े रहे। नेता प्रतिपक्ष के दर्जे को लेकर सत्ता पक्ष का बनाया दबाव भी कारगर नहीं हुआ।

विधानसभा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चयन में दोनों ओर का दोस्ताना रुख अभिभाषण पर हुई चर्चा के दौरान य़ू-टर्न ले गया। विपक्ष ने अभिभाषण की ड्राफ्टिंग से लेकर उसके दिशाहीन साबित करने में कसर नहीं छोड़ी। नेता सदन जयराम ने बेहद सधे अंदाज में विपक्ष के आरोपों पर पलटवार किया। 

चार दिवसीय सत्र में सरकार ने पहले दिन ही नेता प्रतिपक्ष के मुद्दे पर विपक्ष को घेरने का दांव चला। सरकार ने अपने मजबूत संख्याबल के चलते विधानसभा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष चुनाव में विपक्ष को बैकफुट पर रखा।

पहले दो दिन आक्रामक दिखी सरकार सदन में राज्यपाल अभिभाषण पेश होने के बाद विपक्ष के निशाने पर आई। विपक्ष अभिभाषण के छोटा होने के साथ उसमें कोई भी नीतिगत दिशा नहीं होने पर सरकार को घेरता रहा। विपक्ष के नेताओं के आक्रामक रुख ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में हमले और बढ़ेंगे।

दूसरी तरफ, जयराम सरकार ने नेता विपक्ष मुकेश को नेता प्रतिपक्ष का दर्जा न देकर दबाव बनाया है। फिलहाल जयराम सरकार बदले की भावना से काम नहीं करने का बार बार दावा कर रही है। जयराम के कई बार विपक्ष के आचरण और व्यवहार देखने के बयान के भी मायने आने वाले दिनों में सामने आएंगे। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें