पुराने भवनों को भी भूकंप रोधी बनाया जा सकता है। रेट्रोफिटिंग तकनीक अपनाकर पुराने भवनों को भूकंप रोधी बनाया जा सकता है। इस तकनीक के जरिये ऐसे पुराने मकान जिनमें पिल्लर नहीं हैं उन्हें प्राकृतिक आपदा से सुरक्षित किया जा सकता है। इस तकनीक के तहत पुराने भवन के दरवाजों और खिड़कियों के ऊपरी हिस्सों में जहां से छत शुरू होती है लेंटर के बीम डाले जाते हैं।
भवन की दीवारों के कोनों को लेंटर बीम के जरिये आपस में जोड़ दिया जाता है। लेंटर बीम में लोहे की छड़ों और स्टील का प्रयोग किया जाता है। इससे मकान को मजबूती मिलती है और भूकंप के दौरान 80 से 85 फीसदी तक नुकसान की आशंका कम हो जाती है और झटके लगने पर भी पिलर वाले मकान की तरह ये भी हिलते हैं।
शिमला के लोगों को सबक लेने की जरूरत
नेपाल में आए भूकंप और उत्तर भारत में महसूस हुए झटकों को शहरवासियों को भी गंभीरता से लेने की जरूरत है। नगर निगम शिमला क्या कार्य योजना बनाएगा? क्या प्रशासनिक इंतजाम होंगे? इसे भूलकर खुद और परिवार की सुरक्षा के लिए पुराने मकानों को हर हाल में भूकंप रोधी तकनीक से लैस करना होगा। रेट्रोफिटिंग तकनीक के सहारे यह संभव है।
इसके बारे में भारतीय मानक ब्यूरो से मान्यता प्राप्त कोई भी सिविल इंजीनियर (स्ट्रक्चरल) जानकारी दे सकता है। नगर निगम के रिकार्ड के अनुसार शहर में 50 हजार से अधिक मकान हैं। इनमें से कितने भूकंप रोधी तकनीक से लैस हैं। इसकी जानकारी नगर निगम को भी नहीं है। स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग के जानकारों के अनुसार रेट्रोफिटिंग से पुराने मकान जिनमें पिलर नहीं हैं, उन्हें भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदा से सुरक्षित किया जा सकता है।
एमसी की परिधि में 200 मकान जर्जर
नगर निगम परिधि में 200 से ज्यादा जर्जर मकान हैं। बीते दिनों लगातार आए भूकंप के झटकों से इन जर्जर मकानों को कोई नुकसान नहीं पहुंचा। अन्यथा तंग गलियों में राहत और बचाव के काम में बड़ी परेशानी होती। इन जर्जर मकानों की हालत सुधर न पाने का अहम कारण मुकदमेबाजी है। एमसी आयुक्त पंकज राय ने लोगों से अपील की कि भूकंप की भयावहता को समझें और अपने मकान में भूकंप रोधी तकनीक का उपयोग करें। आमजन को भूकंप रोधी तकनीक के बारे में समय-समय पर जागरूक किया जाता है।
क्यों कारगर है रेट्रोफिटिंग तकनीक
भूकंप के दौरान बिना पिलर की इमारत की चारों दीवार स्वतंत्र रूप से अलग - अलग हिलती है। इसलिए मकान गिरने लगता है। रेट्रोफिटिंग तकनीक से बिना पिलर वाली इमारत की दीवार काफी हद तक जकड़ जाती है और दीवार अलग-अलग नहीं हिलती। ऐसे में नुकसान की आशंका कम होती है।