नवोदय विद्यालय समिति(एनवीएस) के गैर-शिक्षण पदों के लिए रविवार को आयोजित परीक्षा में नकल करवाकर पास करवाने के लिए कई अभ्यर्थियों से 4 से 12 लाख रुपये लेने की बात सामने आई है। यह खुलासा पुलिस की प्रारंभिक जांच में अभ्यर्थियों से हुई पूछताछ में हुआ है। कई अभ्यर्थियों ने परीक्षा से पहले ही आधी रकम देने की बात कही है। इससे आशंका है कि देशभर में आयोजित इस परीक्षा में नकल करवाने के लिए एक बड़ा गिरोह सक्रिय था, जो इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के जरिये अभ्यर्थियों को प्रश्नपत्र हल करवा रहा था।
इसके लिए बाकायदा सभी अभ्यर्थियों को एक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस यानी माइक्रो चिप दी गई थी, जिसमें की एक छोटी सिम भी लगी थी। इसी सिम के जरिये अभ्यर्थी नकल करवाने वाले गिरोह के साथ संपर्क में थे। उनके कान के अंदर एक छोटा कैप्सूल (ब्लूटुथ डिवाइस) भी लगाया गया था, जिसे आसानी से देखना संभव नहीं था। यही वजह है कि ज्यादातर मामलों में कड़ी चेकिंग के दौरान यह डिवाइस पकड़ में नहीं आया। पुलिस अब इस नकल गिरोह के मास्टरमाइंड की तलाश में जुट गई है।
14 से 19 मई तक एनवीएस के गैर शिक्षण पदों के लिए देशभर में इस परीक्षा का आयोजन किया गया था। इसके तहत शिमला में भी सीबीएसई से संबंद्ध स्कूलों को परीक्षा केंद्र बनाए गए थे। परीक्षा सुबह 9:30 बजे से 12:00 बजे तक हुई। इसमें अभ्यर्थी सुबह 7:30 बजे परीक्षा केंद्रों में पहुंचे। यहां सबसे पहले पुलिस ने महिला और पुरुष अभ्यर्थियों की अलग-अलग कमरों में तलाशी ली। इसके बाद मेटल डिटेक्टर से भी सभी अभ्यर्थी गुजरे और फिर फिंगर प्रिंट व फेस स्कैनिंग भी की गई, लेकिन सीबीएसई की ओर से परीक्षा केंद्रों में इतनी सख्ती के बावजूद ज्यादातर मामलों में माइक्रो चिप परीक्षा केंद्र में ले जाने की बात सामने नहीं आई।