नई व्यवस्था लागू होने के बाद घरों में बिल बांटने का काम बंद कर दिया जाएगा। अभी एक बिल बांटने में कंपनी को पांच रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि लोग अपना मासिक बिल खुद भी निकाल सकेंगे।
इसके लिए कंपनी की वेबसाइट पर जाकर उपभोक्ता अपना आईडी या अकाउंट नंबर डालेंगे। इसके बाद खुद चेक की गई मीटर रीडिंग अपलोड कर सकेंगे। इसके आधार पर बिल जनरेट होगा। कोई उपभोक्ता कहीं गलत बिल जनरेट न कर दें, इसके लिए बाकायदा समय समय पर चेेकिंग होती रहेगी।
शहर में पानी के 32 हजार उपभोक्ता हैं जिनमें 24 हजार घरेलू जबकि आठ हजार व्यावसायिक उपभोक्ता हैं। कंपनी के पास हर उपभोक्ता की अलग आईडी, खाता और मोबाइल नंबर दर्ज हैं। इन्हीं पर यह मेसेज जाएगा। हालांकि, इससे उन लोगों को परेशानी आएगी जिन्होंने अपने मकान किराए पर दे रखे हैं।
इसका बिल भी संबंधित मीटर मालिक के नाम पर ही जारी होगा। आनलाइन व्यवस्था कंपनी मार्च से लागू कर पाएगी, इस पर भी संशय है। एमसी ने भी आनलाइन सुविधा का दावा किया था लेकिन साल बीतने के बावजूद साफ्टवेयर नहीं बन पाया।
मेसेज से जारी करेंगे बिल
उपभोक्ताओं को मेसेज के जरिये पानी बिल उपलब्ध करवाएंगे। लोग घर बैठे ही बिल जमा करवा सकेंगे। कई कंपनियां इस सिस्टम को सफलतापूर्वक चला रही हैं। इसके बाद बिल बांटने का काम बंद हो जाएगा।-धर्मेंद्र गिल, प्रबंध निदेशक शिमला जल प्रबंधन निगम लिमिटेड