केंद्र सरकार ने सर्व शिक्षा अभियान (एसएसए), राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान (आरएमएसए) और टीचर ट्रेनिंग प्रोग्राम का विलय कर दिया है। शिक्षा विभाग के इन तीनों अभियान को एक साथ जोड़कर अब इंटिग्रेटिड स्कीम ऑफ स्कूल एजूकेशन नाम दिया गया है। यह तीनों अभियान अब एक यूनिट के तौर पर काम करेंगे।
तीनों अभियानों की गुणवत्ता में सुधार के प्रयास के लिए यह विलय किया गया है। राज्य परियोजना निदेशक आशीष कोहली ने बताया है कि इन दिनों अभियानों के लिए अब एक साथ बजट जारी होगा। संभावित है कि जुलाई में होने वाली पीएबी की बैठक में बजट मिलेगा।
हिमाचल में पहली से आठवीं तक सर्व शिक्षा अभियान, नवीं से जमा दो तक राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान लागू है, जबकि शिक्षकों की ट्रेनिंग के लिए एससीईआरटी काम करता है। एसएसए और आरएमएसए एक निदेशालय के तहत आते हैं, जबकि एससीईआरटी इस निदेशालय से बाहर हैं।
उधर, देश के कई राज्यों में यह तीनों अभियान अलग-अलग विभागों के तहत आते हैं। इन अभियानों के तहत केंद्र सरकार द्वारा छात्रों के लिए चलाई जा रही विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं को फंडिंग की जाती है। अभी तक एसएसए, आरएमएसए और ट्रेनिंग के लिए अलग-अलग बजट आवंटित होता है। जबकि तीनों योजनाओं के उद्देश्य एक से हैं।
ऐसे में केंद्र सरकार ने इनका विलय दिया दिया है। बताया जा रहा है कि विलय होने से बजट का दुरुपयोग कम होगा। वर्तमान में एक योजना के लिए निर्धारित धनराशि का इस्तेमाल दूसरी योजना के लिए नहीं किया जा सकता है।
ऐसे में वे राज्य जिन्होंने प्राथमिक शिक्षा में संतोषजनक प्रगति कर ली है और बड़े बच्चों पर ध्यान देना चाहते हैं वे बजट का इस्तेमाल उनके लिए कर सकते हैं। इसके अलावा विलय होने से जिला स्तर पर डाइट, माध्यमिक शिक्षा विभाग और प्राथमिक शिक्षा विभाग के बीच तालमेल और समन्वय भी बढ़ेगा।