वर्ल्ड हेरिटेज शिमला-कालका रेल ट्रैक को इको फ्रेंडली बनाया जाएगा। एक सदी से भी पुराने इस ऐतिहासिक ट्रैक पर ट्रेन के इंजन को चलाने के लिए डीजल का प्रयोग किया जाएगा। रेलवे स्टेशनों से लेकर डिब्बों तक बिजली से संचालित होने वाली सभी सुविधाएं सौर ऊर्जा से चलेंगी।
रेलगाड़ी के अंदर और स्टेशनों में लाइटिंग सिस्टम, फैन आदि सौर ऊर्जा से संचालित होंगे। रेल के डिब्बों को नए सिरे से सोलर पैनल से जोड़ा जाएगा। रेलवे का दावा है कि अगर फंड की कमी आड़े नहीं आई तो एक साल के भीतर ऐतिहासिक ट्रैक को इको फ्रेंडली बना दिया जाएगा।
इससे पहले भी ऐसे कुछ ट्रायल हुए हैं। अच्छे परिणामों को देखते हुए अब रेलवे विभाग इसे स्थायी तौर पर लागू करने की कवायद में जुटा है। डीआरएम अंबाला दिनेश कुमार ने बताया कि पहले हिमालयन क्वीन टॉय ट्रेन को इस सुविधा से लैस किया था।
वर्तमान में इंजन के अलावा रेलगाड़ी में बिजली, हीटिंग और पेंट्री आदि को संचालित करने के लिए डीजल इंजन से ही बिजली तैयार की जाती है। रेलवे स्टेशनों में जब बिजली नहीं होती तो जेनरेटर का प्रयोग होता है। नई परियोजना से यह हेरिटेज ट्रैक न केवल इको फ्रेंडली होगा बल्कि बिजली खर्च में भी कटौती होगी।
ट्रेन के सात में से छह डिब्बों में सोलर बेस्ड पावर सिस्टम लगाना प्रस्तावित है। हर डिब्बे में सौ-सौ वॉट के सोलर पैनल लगेंगे। इसके लिए ट्रेन के डिब्बों का वजन भी घटाया जाएगा, जिससे डीजल की खपत कम होगी।
96 किलोमीटर लंबे ट्रैक पर हैं 18 स्टेशन
शिमला-कालका के 96 किलोमीटर लंबे रेल ट्रैक पर छोटे-बड़े करीब 18 रेलवे स्टॉपेज और स्टेशन हैं। ये कालका, टकसाल, गुम्मन, कोटी, सनावर, धर्मपुर, कुमारहट्टी, बड़ोग, सोलन, सलोगड़ा, कंडाघाट, कनाह, कैथलीघाट, शोघी, तारादेवी, जतोग, समरहिल और शिमला शामिल हैं।
ट्रैक में करीब 102 टनल, 864 के करीब ब्रिज और 919 मोड़ हैं। रोजाना करीब 10 रेलगाड़ियां आती जाती हैं। इस ट्रैक को साल 2008 में विश्व धरोहर का दर्जा मिला था।