धर्माणी ने कहा कि इस तकनीक को धरातल पर उतारने से पहले कंपनी ने गाहर-केट सड़क के सैंपल लिए थे, जिन्हें रुड़की की प्रयोगशाला में भेजा गया था। वहां से सैंपल पास होने के बाद अब सड़क का कार्य शुरू किया गया है। इस मौके पर अधिशासी अभियंता मनीष सहगल, एसडीओ रत्न, जेई बालमुकंद, सड़क निर्माण कर रही कंपनी के अधिकारी, राकेश भारद्वाज, मेहर चंद आदि उपस्थित रहे।
यह है एफडीआर तकनीकएफडीआर तकनीक से गिट्टी युक्त पुरानी सड़क को उपकरणों से उखाड़कर बारीक टुकड़ों में तब्दील कर दिया जाता है।
सड़क की पपड़ी को रीसाइकिल कर सड़क पर बिछाकर समतल किया जाता है। सीमेंट में चिपकने वाले केमिकल मिलाकर उसका घोल तैयार कर समतल किए गए हिस्से पर डाला जाता है। फिर इसे रीसाइक्लर और मोटर ग्रेडर उपकरणों से रोल करने के बाद पैड फुट रोलर और कॉम्पैक्टर से दबाया जाता है। इसके बाद सात दिनों तक पानी से तराई की जाती है। फिर यातायात का दबाव झेलने के लिए सतह के रूप में स्ट्रेस अब्सॉर्बिंग इंटर लेयर तैयार की जाती है। इसके ऊपर पेवर मशीन से बिटुमिन कंक्रीट बिछाकर उस पर रोलर चलाया जाता है।