रसोई गैस के लिए अब उपभोक्ताओं को अपना परमानेंट अकाउंट नंबर (पैन) देना होगा। केंद्र सरकार की जारी गाइडलाइन के बाद अब गैस एजेंसियां नया कनेक्शन लेने वाले उपभोक्ताओं से पैन मांग रही है।
पुराने उपभोक्ताओं को भी पैन मुहैया कराने के मैसेज भेजे जा रहे हैं। परमानेंट अकाउंट नंबर को कंपनी के सॉफ्टवेयर में अपलोड करते ही सालाना 10 लाख रुपये आय वाले उपभोक्ताओं की ऑटोमेटिक ही सब्सिडी कट जाएगी।
आईटीआर से लिंक करते ही तुरंत पता लग जाएगा कि उपभोक्ता की वार्षिक आय कितनी है। बता दें कि केंद्र सरकार ने सालाना 10 लाख रुपये आय वालों की सब्सिडी बंद करने के आदेश दिए हैं।
पैन कार्ड देने से नहीं झेलनी पड़ेगी ये परेशानी
शिमला में तैनात सहायक प्रबंधक एलपीजी सेल्ज मानसी दुल्लो ने बताया कि केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय से आदेश मिले हैं। पैन लेकर सॉफ्टवेयर में अपलोड किए जा रहे हैं।
गाइडलाइन में कहा गया है कि अगले एक-दो सालों में सभी उपभोक्ताओं के पैन सर्बर में अपलोड कर लें। हालांकि अभी पैन को अनिवार्य नहीं किया है, लेकिन इससे उपभोक्ताओं को भी फायदा होगा। उन्हें बार-बार डेक्लारेशन नहीं देनी पड़ेगी।
क्यों मांग रहे पैन नंबर
बताया जा रहा है कि आधार नंबर भले ही बैंक खातों से लिंक हो, लेकिन सालाना आय का सही पता नहीं चल पा रहा है। पैन से आईटीआर लिंग से तुरंत आय का सही और पूरा ब्योरा मिल जाता है।
डेढ़ लाख उपभोक्ताओं की बंद है सब्सिडी
हिमाचल में करीब डेढ़ लाख उपभोक्ताओं की गैस सब्सिडी बंद है जिनकी सालाना आय दस लाख रुपये है। इसके दायरे में प्रदेश के कई वरिष्ठ आईएएस, आईपीएस, आईएफएस, एचएएस, एचपीएस, डॉक्टर, क्लास वन-टू अफसर और बड़े घराने हैं।
इसके अलावा हजारों उपभोक्ताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील पर गैस सब्सिडी स्वयं भी छोड़ दी है। प्रदेश में करीब 14 लाख रसोई गैस सिलेंडर उपभोक्ता हैं।