केंद्र और प्रदेश सरकार ने जिले के सेब बागवानों को बड़ा झटका दिया है। ओलों से फसलों के बचाव के लिए बागीचों में लगने वाली जालियों पर उद्यान विभाग अनुदान नहीं दे रहा है। विभाग के पास जालियों पर सब्सिडी देने के लिए बजट ही नहीं है। जिले में हर साल पचास से साठ प्रतिशत ओलों से फसलों का नुकसान होता है।
प्रदेश सरकार और उद्यान विभाग बागीचों में ओलों से फसल बचाने के लिए बागवानों को बागीचों पर जालियां लगाने के लिए प्रेरित करते हैं। 80 प्रतिशत अनुदान भी दिया जाता है। पिछले लंबे समय से जालियों पर अनुदान देने के लिए विभाग के पास बजट न होने से सैकड़ाें बागवानों को जालियों पर किसी भी तरह की सब्सिडी नहीं मिल रही है।
दो लाख हैं सेब के बागवान
जिले में करीब दो लाख से ज्यादा सेब और अन्य फलों के बागवान हैं और पहाड़ी क्षेत्रों में ज्यादातर फसलों का नुकसान फलों पर ओलों के गिरने से होता है। बीते साल जिले में करीब तीन करोड़ सेब की पेटियों का उत्पादन हुआ था और अगर ओलों से फसल बरबाद न होती तो आंकड़ा दोगुना होता।