कर्मचारियों की कमी से जूझ रहे कारागार विभाग ने अपना बोझ कम करने की कवायद शुरू की है। इसके तहत अब स्वास्थ्य संबंधी छोटी-छोटी समस्याओं के लिए कैदियों को जेल से अस्पताल और अस्पताल से जेल लाने ले जाने को कम किया जाएगा।
इसके लिए विभाग ने अपनी तीन जेलों में विभिन्न तरह की जांच मशीनों को स्थापित करने के लिए प्रस्ताव तैयार कर रहा है। इन मशीनों को चलाने के लिए वह अपने कर्मचारियों को ही ट्रेनिंग भी दिलाएगा। अभी तक ब्लड से लेकर यूरिन टेस्ट और एक्सरे जैसी सामान्य जांचों के लिए भी कारागार विभाग को अपनी जेलों में बंद कैदियों को जिला अस्पताल ले जाना पड़ता था।
इस कवायद में पुलिस और जेल के जवानों की ऊर्जा, समय व धन बर्बाद होता था। छोटी समस्याओं को दूर करने के लिए अब कारागार विभाग सूबे की नाहन, धर्मशाला और कंडा केंद्रीय जेल में सेमी ऑटोमेटिक एनालाइजर मशीन लगाने की तैयारी कर रहा है।
डीजी जेल सोमेश गोयल ने बताया कि इसके अलावा ईसीजी मशीन और माइनर ऑपरेशन थियेटर के साजो-सामान से दोनों जेलों को लैस करने पर विचार किया जा रहा है। गोयल ने बताया कि इन मशीनों को चलाने के लिए जेल के ही वार्डरों को ट्रेनिंग दी जाएगी।
इसके लिए एसएसबी से संपर्क किया गया है, जो चार महीने का क्रैश कोर्स करवाते हैं। इसके अलावा फार्मासिस्ट के पद पहले से सृजित हैं, जिन्हें भरकर दोनों तरह के कार्य किए जा सकेंगे। गोयल ने कहा कि इससे अस्पताल जाते हुए कैदियों के भागने की संभावना कम होगी। साथ ही कारागार विभाग पर पड़ने वाला आर्थिक व श्रमशक्ति का बोझ कम होगा।