कुल्लू जिले के निरमंड तहसील के अंतर्गत गांव तूनन में देवता नाग ने अपने मंदिर में बलि प्रथा को बंद कर दिया है। पहले जाहरूनाग देवता के मंदिर में चाहे शिखर फेर, भूत निकालना, दंड मरना, दिशा पूजा काली पूजा, मंदिर की प्रतिष्ठा और गुर निकालने जैसे कार्यो पर 10 बकरों की बलि प्रत्येक कार्य में लगता था।
लेकिन उच्च न्यायालय के पशुबलि पर प्रतिबंध के चलते देवता जाहरू नेगा ने स्वंय अपने गुर के माध्यम से सभी कार्मों में बलि प्रथा पर विराम लगा दिया है।
अब मंदिर में पूजा पाठ और अन्य कार्यों में बक रों की बलि के जगह नारियल से पूजा पाठ किया जाएगा। देवता के इस आदेश से देवलू संगठन और गरीब लोगों में खुशी लहर है।