हालांकि, जिला के कुछ स्कूलों में अंग्रेजी माध्यम की सुविधा पिछले सत्र से शुरू हो चुकी है। लेकिन इस सत्र से जिला के तमाम स्कूलों में यह सुविधा शुरू हो जाएगी। सरकारी स्कूलों में इस मुहिम के शुरू होने से बच्चे फरार्टेदार इंग्लिश बोल सकेंगे।
किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में नहीं पिछड़ेंगे। शिक्षा विभाग सरकारी स्कूलों में शिक्षा के स्तर को ऊंचा करने के लिए प्रयासरत है। इस सुविधा के शुरू होने से सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या में इजाफा होगा।
शिक्षा विभाग शुरुआत में इस सत्र से साइंस और गणित विषय को अंग्रेजी में पढ़ाने का विकल्प देगा। संस्कृत, हिंदी और ड्राइंग को अंग्रेजी में पढ़ाने की जरूरत नहीं रहती।
सामाजिक विज्ञान को भी हिंदी में इसलिए पढ़ाया जाएगा क्योंकि प्रतियोगी परीक्षाओं में इस विषय की ज्यादा जरूरत नहीं पड़ती। विशेषज्ञों का मानना है कि साइंस और मैथ्स का माध्यम इसलिए बदला गया है ताकि जेईई, मेडिकल साइंस (नीट) और फार्मेसी समेत अन्य तकनीकी शिक्षा में बच्चे अंग्रेजी में पिछड़ न जाएं।
सरकारी स्कूलों में इस सत्र से छठी से बारहवीं कक्षा तक अंग्रेजी माध्यम में पढ़ाई होगी। बच्चे हिंदी के साथ अंग्रेजी में भी पढ़ाई कर सकेंगे। पिछले सत्र से जिला के कई स्कूलों में यह सुविधा शुरू की गई है। लेकिन इस सत्र से सभी स्कूलों में सुविधा शुरू हो जाएगी। - सोमदत्त सांख्यान, उपनिदेशक, उच्चतर शिक्षा हमीरपुर