संवाद न्यूज एजेंसी शिमला। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (आईजीएमसी) के मानसिक रोग वार्ड में सामान्य के साथ अब नशे के आदी मरीजों को नहीं रखा जाएगा। इनके लिए अलग वार्ड बनेगा। सरकार इस कार्य को लेकर काम कर रही है। यह बात स्वास्थ्य मंत्री धनीराम शांडिल ने बचत भवन में आयोजित कार्यक्रम में कही।
हिमाचल ज्ञान विज्ञान समिति की ओर से मंगलवार को युवा बचाओ अभियान के तहत कार्यक्रम का आयोजन किया गया। आरकेएमवी, कोटशेरा, धामी कॉलेज, फाइन आर्ट्स कॉलेज से आए सैकड़ों छात्र-छात्राओं ने कार्यक्रम में हिस्सा लिया। कार्यक्रम के दौरान समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि मौजूदा समय में आईजीएमसी के मानसिक रोग वार्ड में रोगियों और नशे के आदी मरीजों के लिए तीस बिस्तरों की व्यवस्था है। इन वार्डों में सभी का उपचार किया जाता है। ऐसे मरीजों को अलग से वार्ड की जरूरत रहती है। इस पर स्वास्थ्य मंत्री धनीराम शांडिल ने कहा कि नशे के आदी मरीज जिनका अस्पताल में उपचार करवाया जा रहा है, उन्हें अब अलग वार्ड की व्यवस्था की जाएगी। इस मौके पर मंत्री ने नशे के खिलाफ द व्हाइट ट्रूथ वेब सीरीज का ट्रेलर भी लांच किया। इसमें नशे की गिरफ्त में आ चुके लोगों के ऊपर आधारित सीरिज के 7 एपिसोड होंगे। इस अवसर पर अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी प्रोटोकॉल ज्योति राणा, अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी कानून एवं व्यवस्था पंकज शर्मा, एसी टू डीसी देवीचंद ठाकुर, जिला कल्याण अधिकारी कपिल शर्मा, जेसी चौहान, डॉ. ओपी कायथ, डॉ. रवि भूषण, जीयानंद और सत्यवान पुंडीर मौजूद रहे।
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महिलाओं के लिए बनेगा अलग नशा मुक्ति केंद्र
स्वास्थ्य मंत्री धनीराम शांडिल ने कहा कि सरकारी क्षेत्र में एक नशा मुक्ति केंद्र स्थापित करने के विकल्प तलाशे जाएंगे जिससे नशे के आदि लोगों को सही उपचार मिल सके। प्रदेश में नशे की आदी लड़कियों की संख्या बढ़ रही है, इसलिए अलग से नशा मुक्ति केंद्र बनाने की दिशा में सरकार काम कर रही है।
नशे को हरा चुके पंकज ने साझा किए अनुभव
नशे को हरा चुके पंकज ने कार्यक्रम में अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि वह छह साल से चिट्टा ले रहा था। इससे पहले मैं 14 साल तक भांग का आदि था। मैंने शरीर की कई नसों में चिट्टे के इंजेक्शन लगाए। कई बार तो इंजेक्शन लगाने के लिए मुझे नसें भी नहीं मिलती थीं। मैं नशा छोड़ना चाहता था लेकिन ऐसा कर नहीं पा रहा था। मैं ज्यादा से ज्यादा दो दिन तक बिना नशा किए रह पाता था। मेरे साथ जो नशा करते थे करीब 14 दोस्तों ने अपनी जान नशे के कारण गंवा दी है। मेरे परिवार वालों ने मेरा साथ दिया और आईजीएमसी में उपचार करवाया। परिवार ने मेरा साथ नहीं छोड़ा। नशे को छोड़ने के परिवार वालों की अहम भूमिका होती है।