राज्य विद्युत नियामक आयोग में सदस्य (न्यायिक) यशवंत सिंह चोगल की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर प्रदेश हाईकोर्ट ने नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। मुख्य न्यायाधीश लिंगप्पा नारायण स्वामी और न्यायाधीश अनूप चिटकारा की खंडपीठ ने हाईकोर्ट की वरिष्ठ अधिवक्ता सुनीता शर्मा की ओर से दायर याचिका की सुनवाई के बाद यह आदेश पारित किए। मामले पर आगामी सुनवाई 28 सितंबर को होगी।
याचिका में प्रार्थी ने राज्य सरकार और चयन समिति की कार्य शैली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। प्रार्थी ने मेरिट के साथ खिलवाड़ और पक्षपात करने का आरोप लगाया है। प्रार्थी ने चयन समिति की ओर से किए पक्षपात के दृष्टिगत उस समिति को भंग करने की मांग की है। विद्युत नियामक आयोग में सदस्य (विधि) के चयन के लिए चयन समिति के सदस्यों में प्रदेश के मुख्य सचिव, मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष और केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष शामिल थे।
उधर, आयोग के नए अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर पसोपेश में फंसी सरकार की हाईकोर्ट के इस नोटिस के बाद मुश्किलें बढ़ गई हैं। सेवानिवृत्त आईएएस सहित सिविल और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरों के अध्यक्ष पद के लिए आवेदन करने के चलते सरकार पहले ही चयन को लेकर उलझी हुई है। बदली परिस्थितियों के बीच अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर भी कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। विद्युत नियमों ,तकनीक और व्यवसायिक मामलों को देखने की नियामक आयोग पर जिम्मेवारी रहती है। ऐसे में सरकार को इस मामले को लेकर बहुत अधिक सतर्कता बरतने की जरूर रहेगी।