प्रदेश के 21 कॉलेज प्रिंसिपलों को उच्च शिक्षा निदेशालय ने नोटिस जारी किया है। इन पर एससी-एसटी-ओबीसी छात्रवृत्ति योजना में लापरवाही बरतने का आरोप है। ये कॉलेज पात्र विद्यार्थियों के दस्तावेजों की जानकारी नहीं दे रहे हैं। शिक्षा निदेशालय ने 15 अक्तूबर तक रिकॉर्ड तलब किया है।
उच्च शिक्षा निदेशालय के संयुक्त निदेशक और स्टेट नोडल ऑफिसर छात्रवृत्ति एससी शर्मा ने इसकी पुष्टि की है। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और ओबीसी वर्ग के विद्यार्थियों को सरकार पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के तहत पैसा देती है। उच्च शिक्षा प्राप्त करने को यह राशि दी जाती है।
सभी कॉलेजों के माध्यम से छात्रवृत्ति के लिए विद्यार्थियों से आवेदन लिए जाते हैं, लेकिन प्रदेश के 21 कॉलेजों से पात्र विद्यार्थियों के दस्तावेज शिक्षा निदेशालय में जमा नहीं करवाए गए हैं। इनसे कई बार दस्तावेज मुहैया करवाने को कहा गया। बावजूद इसके कॉलेज प्रबंधन लापरवाही बरत रहे हैं। कॉलेज प्रबंधनों से शिक्षा निदेशालय ने पात्र विद्यार्थियों के दस्तावेजों की प्रमाणिकता साबित करने को कहा था।
इन कॉलेजों से मांगा ब्योरा
हिमाचल प्रदेश सरकार
विद्यार्थियों के दस्तावेज, मेंटेनेंस अलाउंस और फीस का ब्योरा भी मांगा था। निदेशालय ने कॉलेजों को नोटिस जारी कर कहा है छात्रवृत्ति देने को विभाग के पास पर्याप्त बजट है। कॉलेज प्रबंधन की लापरवाही से बजट जारी नहीं हो पा रहा है। निदेशालय ने चेतावनी दी कि
अगर पात्र विद्यार्थी छात्रवृत्ति लेने से छूट जाता है तो इसकी सारी जिम्मेवारी कॉलेज प्रबंधन की होगी। शिक्षा निदेशालय ने 13 से 15 अक्तूबर तक सभी कॉलेजों को जानकारी मुहैया करवाने की मोहलत दी है। अगर कॉलेजों ने जानकारी नहीं दी तो अन्य पात्र विद्यार्थियों को बजट जारी कर दिया जाएगा।
डिग्री कॉलेज तीसा (चंबा), सुजानपुर (हमीरपुर), नौरा (कांगड़ा), लडभड़ोल (मंडी), हरीपुर गुलेर (कांगड़ा), पांवटा साहिब (सिरमौर), रामपुर (शिमला), बंजार (कुल्लू), लांबथाच (मंडी), हरीपुर (कुल्लू), बरोटीवाला (सोलन), डाडासीबा (कांगड़ा), सोलन, सरस्वती नगर (शिमला), संगड़ाह (सिरमौर), सुन्नी (शिमला), मंडी, संधोल (मंडी), खुंडियां (कांगड़ा), कोटशेरा (शिमला) और धर्मपुर (मंडी) कॉलेज प्रिंसिपलों से ब्योरा मांगा है।