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चार दिन की चांदनी के लिए हर साल करोड़ों स्वाह कर रही सरकार

Sun, 18 Dec 2016 12:06 AM IST
सुनील चड्ढा/अमर उजाला, धर्मशाला
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25 दिसंबर, 2006 को महज सात महीने के रिकॉर्ड समय में 35000 स्क्वेयर फीट का तपोवन में बना विधानसभा परिसर महज चार दिन की चांदनी बनकर रह गया है। 2003-07 के कार्यकाल वाली वीरभद्र सरकार ने तपोवन में हिमाचल के दूसरे विधानसभा परिसर की नींव ऊपरी और निचले हिमाचल के बीच सत्ता का संतुलन साधने को रखी थी। 
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तपोवन विस परिसर के शुभारंभ के समय निर्माण का उद्देश्य केवल कांगड़ा सहित चंबा, हमीरपुर, ऊना और मंडी जिलों के लोगों को सरकार के और करीब लाना था, लेकिन तपोवन विस परिसर के रूप में लोगों को और करीब लाने की सरकार की कवायद सही नहीं बैठ पाई। वर्ष 2006 से 2016 तक हर वर्ष तपोवन विस परिसर का शीतकालीन सत्र के रूप में महज न्यूनतम तीन और अधिकतम 7 दिन ही प्रयोग हुआ। 

शेष 358 दिन तपोवन परिसर का कोई प्रयोग नहीं हुआ। हैरानी इस बात की है कि हर वर्ष तपोवन विधानसभा परिसर के रखरखाव और शीत सत्र के दौरान मंत्रियों कर्मचारियों के रहने, खाने और उनकी परिवहन व्यवस्था पर करीब तीन से चार करोड़ रुपये खर्च होते हैं। इसके परिणामस्वरूप सत्र के रूप में जनता को महज तीन से सात दिन मिलते हैं। यही कारण रहा था कि पिछले सत्र के दौरान खुद विधानसभा अध्यक्ष ने खीझ में आकर तपोवन परिसर को सफेद हाथी करार दे दिया था। 
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वर्ष 2014 के तपोवन में शीत सत्र के दौरान अनुमान के मुताबिक रहने, खाने और परिवहन व्यवस्था पर ही करीब पांच करोड़ खर्च हुए थे। वर्ष 2015 में शीत सत्र के दौरान तपोवन विधानसभा का खर्चा करीब दो करोड़ रुपये आया था। इसमें 50 लाख से ज्यादा रहने और खाने पर खर्च हुए थे। कांग्रेस और भाजपा सरकारों से हमेशा शीतकालीन सत्र को बढ़ाने की आस निचले हिमाचल की जनता लगाती रही, लेकिन किसी भी सरकार ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। 

ई-विधान प्रशिक्षण केंद्र खोलने की कवायद ठप
पिछले साल शीत सत्र के दौरान तपोवन परिसर में देश का पहला राष्ट्रीय ई विधान प्रशिक्षण केंद्र खोलने की कवायद एक साल बाद डीपीआर से आगे नहीं बढ़ पाई। तपोवन में देश की विभिन्न विधानसभाओं, विधानमंडलों के अध्यक्षों उपाध्यक्षों, सदस्यों और संबंधित अफसरों- कर्मचारियों को ई विधान प्रणाली की संपूर्ण जानकारी और प्रशिक्षण दिया जाना था। 

तपोवन विधानसभा परिसर पर हर वर्ष करीब 3 से 4 करोड़ रुपये खर्च होते हैं। शीत सत्र के रूप में इस परिसर का पूरा प्रयोग नहीं हो पा रहा है। इसलिए, परिसर में राष्ट्रीय ई विधान प्रशिक्षण केंद्र खोलने का प्रस्ताव बनाया गया था। इसकी डीपीआर बन गई है। अब प्रस्ताव की मंजूरी के लिए केंद्र में मामला लंबित पड़ा है। मैं शीत सत्र के बाद दिल्ली जाउंगा और राष्ट्रीय ई विधान प्रशिक्षण केंद्र खोलने का मामला उठाऊंगा। -बीबीएल बुटेल, विधानसभा अध्यक्ष 

10 कर्मचारी पूरा साल खाली परिसर की करते हैं चाकरी
वर्तमान में तपोवन विधानसभा परिसर में करीब 10 नियमित कर्मचारी पूरा साल परिसर की देखरेख करते हैं। सभी 10 कर्मचारियों की महीने की तनख्वाह करीब 2 से तीन लाख रुपये के बीच बनती है। भवन की मरम्मत और बिजली पानी का हर महीने बिल का खर्चा अलग से आता है। 

हिमाचल विधानसभा का शीत सत्र कल से 
हिमाचल प्रदेश विधानसभा का शीत सत्र सोमवार से शुरू होने जा रहा है। ये पिछले वर्ष की भांति तपोवन धर्मशाला में आयोजित किया जा रहा है। 19 दिसंबर को शुरू होने जा रहा ये शीत सत्र 23 दिसंबर को संपन्न होगा। सत्रारंभ से एक दिन पहले रविवार को सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही एक-दूसरे को घेरने की अपनी रणनीति बनाएंगे। 18 दिसंबर को धर्मशाला में दोनों पार्टियों के विधायक दलों की बैठकें रखी गई हैं। 

हिमाचल प्रदेश की 12वीं विधानसभा का ये तेरहवां सत्र होगा। चूंकि, राज्य सरकार का कार्यकाल अगले साल 25 दिसंबर 2017 को खत्म होने जा रहा है, इसलिए इसे 12वीं विधानसभा का आखिरी शीत सत्र भी माना जा रहा है। धर्मशाला मेें प्रदेश विधानसभा में करीब सात सौ से अधिक सवाल पूछे जाएंगे। ये सड़क, पानी, शिक्षा और तमाम मूलभूत सुविधाओं के अलावा विभिन्न समस्याओं पर पूछे जाएंगे। इसके अलावा कुछ विधेयकों को भी पारित किया जाना है। 

धर्मशाला के लिए रवाना हुई सरकार
विधानसभा शीत सत्र के मद्देनजर राज्य सरकार के अधिकारी और कर्मचारी भी बड़ी संख्या में धर्मशाला के लिए रवाना हो गए हैं। शनिवार को राज्य सचिवालय के अधिकांश कार्यालय भी सूने-सूने नजर आए।
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