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आजादी के 69 साल बाद भी नहीं बनी सड़क, खाली हो गए ये गांव

Mon, 19 Dec 2016 12:13 PM IST
प्रवीण कुमार/अमर उजाला, हमीरपुर
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आजादी के 69 साल बाद हिमाचल के संपूर्ण साक्षर जिले हमीरपुर की चलोह पंचायत के तीन गांव आज तक सड़क सुविधा से नहीं जुड़ पाए हैं। नतीजतन नागलंबर, मकरोड़ी और बनोह के लोग अपने पक्के घरों पर ताले जड़कर पलायन को मजबूर हैं। मकरोड़ी गांव तो तकरीबन खाली हो गया है। सड़क, अस्पताल, स्कूल, आंगनबाड़ी केंद्र और सस्ते राशन का डिपो भी इन गांवों से कोसों दूर है।
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मरीजों को चार से पांच किलोमीटर दूर अस्पताल तक चारपाई पर ले जाना पड़ता है तो राशन, सिलेंडर और अन्य सामान पीठ पर ढोना पड़ता है। हालत यह है कि इन गांवों में लोग अपनी बेटियां ब्याहने से कतराते हैं। गांव में कुछेक परिवार ऐसे हैं, जिनकी बहुएं मायके में रह रही हैं। पलायन के सिवाय कोई चारा नहीं है। साल भर पहले सड़क का भूमिपूजन हो चुका है, लेकिन सरकार से अब तक बजट मंजूर नहीं हुआ।

चुनावों के दौरान एक चक्कर नेता जरूर लगाते हैं, लेकिन उनके आश्वासन कोरे साबित हुए हैं। यहां के नाराज लोग लोकसभा और विधानसभा के उपचुनाव का बहिष्कार कर चुके हैं, लेकिन अभी तक सड़क फाइलों में अटकी हुई है।  लोनिवि के एक्सईएन एनपीएस चौहान ने कहा कि सड़क निर्माण के लिए सर्वे हो चुका है। ढाई करोड़ की डीपीआर मंजूरी के लिए सरकार को भेजी जा चुकी है। लेकिन अभी तक नाबार्ड से मंजूरी नहीं मिली है।
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12 साल पहले बंद हो चुका प्राइमरी स्कूल
ग्रामीणों के पलायन और कम छात्र संख्या के चलते राजकीय प्राथमिक पाठशाला नागलंबर करीब 12 वर्ष पहले बंद हो चुका है। स्कूल के दो पक्के कमरे, रसोईघर, पेयजल टैंक और शौचालय भवन के आसपास झाडि़यां उग आई हैं। अब गांव के बच्चों को प्राइमरी एजूकेशन के लिए धैल, जबकि आगे की पढ़ाई के लिए छह किलोमीटर दूर पैदल सफर कर गांव रंगड़ आना पड़ता है। जबकि स्नातक के लिए 40 किलोमीटर दूर या तो सुजानपुर या हमीरपुर कॉलेज आना पड़ता है।

राजेंद्र राणा ने किया था सड़क का भूमिपूजन
आपदा प्रबंधन बोर्ड के उपाध्यक्ष राजेंद्र राणा ने 24 सितंबर 2015 को नागलंबर के लिए सड़क का भूमिपूजन किया था। धैल गांव से करीब चार किलोमीटर लंबी सड़क के लिए 2.47 करोड़ की डीपीआर तैयार की गई। लेकिन प्रदेश सरकार से अभी तक सड़क के लिए बजट स्वीकृत नहीं हो पाया। इससे पहले वर्ष 1993 से अब तक गांव के लिए तीन बार सड़क निर्माण का सर्वेक्षण हो चुका है।

इतने परिवारों का हुआ पलायन
नागलंबर से वार्ड पंच एवं पूर्व सैनिक मिलाप चंद ने बताया कि नागलंबर में पहले 250 लोग रहते थे, लेकिन वर्तमान में 30 परिवारों के 105 सदस्य ही बचे हैं। बनोह में पहले 20 से 25 परिवार थे, वर्तमान में तीन परिवार हैं। मकरीड़ी में पहले 15 परिवार थे, वर्तमान में एक भी परिवार नहीं है। कमल देव, भोटा देवी, दिलीप सिंह, केहर सिंह, शंभू राम, रोशन लाल, बख्शी राम, प्रकाश चंद, राजेंद्र कुमार, धर्म चंद और कर्मचंद का परिवार पलायन कर चुका है।

सड़क न होने से नारायण दास खो दी बहू
नारायण दास (80) पुत्र खड़कू राम ने बताया कि उनका एक बेटा लुधियाना में रहता है। दूसरे बेटे की पत्नी की डिलिवरी के समय उपचार न मिलने के चलते अस्पताल ले जाते रास्ते में मौत हो गई। ब्रह्मी देवी (74) ने बताया कि सड़क न होने से उनके लड़कों को विवाह के लिए रिश्ते नहीं आ रहे हैं। सरोता देवी का कहना है कि उनकी बहू अब पालमपुर में अपने मायके में रह रही है।

क्या कहते हैं विधायक और पूर्व विधायक
सुजानपुर विस क्षेत्र के विधायक नरेंद्र ठाकुर का कहना है कि उन्होंने विधायक प्राथमिकता के तहत इस सड़क की डीपीआर को नाबार्ड के तहत स्वीकृति के लिए भेज दिया है। बजट मंजूर होते ही गांव के लिए सड़क का निर्माण करवाया जाएगा। आपदा प्रबंधन बोर्ड के उपाध्यक्ष ने बिना बजट सड़क का भूमि पूजन कर ग्रामीणों के साथ धोखा किया।

आपदा प्रबंधन बोर्ड के उपाध्यक्ष राजेंद्र राणा ने कहा कि नागलंबर के लिए सड़क निर्माण उनकी प्राथमिकता में है। मामला प्रदेश सरकार को भेजा जा चुका है। बजट मंजूर होते ही जल्द सड़क निर्माण का कार्य शुरू किया जाएगा। उन्होंने भूमि पूजन के बाद सात लाख की लागत से कुछ मीटर सड़क बना दी है।
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