राजधानी शिमला में पीलिया के आतंक से लोग खौफ में हैं। वहीं, अस्पतालों में मरीजों और तीमारदारों के लिए साफ पानी तक नहीं मिल रहा है। स्वास्थ्य महकमे के आंकड़ों के अनुसार अस्पतालों में पीलिया रोग से पीड़ित लोगों का आंकड़ा एक हजार से पार हो चुका है। हालांकि, हकीकत में हजारों लोग पीलिया की गिरफ्त में हैं। अस्पतालों में रोजाना पीलिया से ग्रस्त पचास से साठ नए मामले आ रहे हैं।
अमर उजाला की पड़ताल में सामने आया है कि आईजीएमसी, डीडीयू और कमला नेहरू अस्पताल में मरीजों के लिए प्रशासन ने शुद्ध पेयजल व्यवस्था का कोई बंदोबस्त नहीं किया है। तीमारदारों को मजबूरन बोतल बंद पानी का इस्तेमाल करना पड़ रहा है या पीने के लिए अलग से घरों से उबला पानी मंगवाना पड़ रहा है।
अस्पतालों में साफ पानी की सुविधा केवल अधिकारियों के कमरों तक ही सीमित है, जबकि मरीजों को अस्पताल में लगे कूलरों व प्याऊ से प्यास बुझानी पड़ रही है। इसी कड़ी में ‘अमर उजला’ की टीम ने शनिवार को अस्पतालों में जाकर लोगों को मुहैया करवाए जा रहे पानी का निरीक्षण किया।
केएनएच की डिस्पेंसरी-वार्ड के आरओ खराब
स्थान : कमला नेहरू अस्पताल समय 12.05 मिनट। अस्पताल की डिस्पेंसरी में कई महीनों से आरओ खराब पड़ा है। हद तो तब हो गई, जब इसे बदलने के स्थान पर ढक दिया गया। वहीं ओपीडी के बाहर लगा वाटर प्यूरीफायर भी बंद पड़ा हुआ है। अस्पताल आए लोग मजबूरी में नलके का पानी पी रहे हैं। यहां ठियोग से अस्पताल आए जोगिंद्र ने बताया कि बोतल बंद पानी साथ लाए है। लेकिन गलती से बैग अपने परिचित के पास भूल गए हैं। शिमला में पीलिया फैला है। लेकिन प्यास लगी है और मजबूरी भी है इसलिए पानी पी रहा हूं।
डीडीयू
स्थान : डीडीयू अस्पताल समय 2.35 मिनट। शनिवार को जब ‘अमर उजाला’ टीम अस्पताल पहुंची तो नजारा कुछ और ही था। अस्पताल आने वाले लोग साथ में बोतल बंद पानी ला रहे थे। डीडीयू में अपने परिचित से मिलने आए विक्की ने बताया कि अस्पताल में पीलिया के बहुत से लोग उपचार के लिए आ रहे हैं। यहां पर प्याऊ में सीधे ही टंकियाें का पानी आ रहा है। ऐसे में एहतियात के तौर पर ऐसा करना पड़ रहा है।
इमरजेंसी के बाहर लगा नया आरओ
स्थान : आईजीएमसी समय 12.55 मिनट। प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल में जब
‘अमर उजाला’ की टीम पहुंची तो यहां प्रबंधन की नाकामी यहां पर साफ झलक रही
थी। मुख्य गेट के सामने दवाइयों की दुकानों के पास लगे कूलर से लोग पानी पी
रहे थे। मरीजों की सुविधा के लिए कूलर तो लगा है लेकिन उसमें पानी को
फिल्टर करने का कोई पुख्ता इंतजाम नहीं है। बिना फिल्टर किए नलों से आ रहे
पानी को अस्पताल आए लोग पी रहे हैं। दूसरी ओर प्याऊ के नजदीक काफी गंदगी
फैली हुई है।
पिछले कई माह से प्याऊ में लगे सिंक की सफाई तक नहीं की गई
है। वहीं, कोटखाई के मनीष ने बताया कि वार्ड सिस्टर रूम से पानी पी की
बोतलें भर रहे हैं लेकिन जब टीम वहां गई तो हाल कुछ और ही थे। एक्वागार्ड
के समीप कॉकरोच घूम रहे थे। आईजीएमसी के वरिष्ठ चिकित्सा डा. रमेश चंद ने बताया कि पीलिया रोग और लोगों को न हो, इसके लिए आपातकालीन वार्ड के बाहर नया आरओ सिस्टम लगा दिया गया है।
वार्डों में लगे हैं एक्वागार्ड
डीडीयू अस्पताल की एमएस डा. रंजना राव ने बताया कि अस्पताल आए लोग वार्डों में लगे एक्वागार्ड से पानी पी रहे हैं। एहतियात के तौर पर कुछ लोग अपने साथ बोतल बंद पानी ला रहे हैं।
बीते दिन ही ठीक करवाए एक्वागार्ड
केएनएच के एमएस डा. एलएस चौधरी ने बताया कि एक्वागार्ड कुछ दिनों पहले ही ठीक करवाए हैं। पीलिया रोग से बचाव के लिए मरीजों को पानी उबाल कर पीने की सलाह दी जा रही है।