शहर में चलने वाली 15 इलेक्टि्रक बसें खड़ीं, बैटरियां और स्पेयर पार्ट्स की कमी के कारण हो रही दिक्कत, मुख्यालय से मांगा बजट
लोग एचआरटीसी की खटारा बसों में सफर करने को मजबूर
राजधानी में 68 इलेक्टि्रक बसों का संचालन कर रहा डिपो अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। शहर में चलने वाली कई इलेक्टि्रक बसें स्पेयर पार्ट्स और बैटरियां खराब होने के कारण खड़ी हो गई हैं। इस वजह से एचआरटीसी लोकल डिपो के कई रूट प्रभावित हो रहे हैं। इसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।
मजबूरी में लोकल डिपो को कई रूटों पर पुरानी और खटारा बसों को भेजना पड़ रहा है तो कई रूट प्रभावित हो रहे हैं। शहर में एचआरटीसी की 200 से अधिक बसों का संचालन होता है। इसमें 68 इलेक्टि्रक बसें शामिल हैं लेकिन वर्तमान में 15 से अधिक इलेक्टि्रक बसें विभिन्न तकनीकी दिक्कतों के कारण सड़कों के किनारे धूल फांक रही हैं। पहले स्पेयर पार्ट्स के कारण बसों को दुरुस्त करने में दिक्कतें आ रही थीं। अब कई बसों की बैटरियां खराब होने के कारण इनका संचालन नहीं हो पा रहा है। इलेक्टि्रक बसों की एक बैटरी की कीमत पंद्रह लाख रुपये है। ऐसे में लोकल डिपो ने बसों की बैटरियां खरीदने के लिए मुख्यालय से बजट की मांग की है। बजट मिलने के बाद ही बैटरियों की खरीद होने पर ही इन बसों का संचालन हो पाएगा। हालांकि बसों की मरम्मत के लिए कुछ स्पेयर पार्ट्स जरूर निगम को मिल गए हैं। इससे कुछ बसों के आने वाले समय में दुरुस्त होने की उम्मीद है लेकिन बैटरियों के लिए बजट नहीं होने से इन बसों के संचालन को लेकर अभी भी संशय बना हुआ है।
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एचआरटीसी बसों में हजारों लोग करते हैं सफर
एचआरटीसी के लोकल डिपो की बसों में हर रोज हजारों लोग सफर करते हैं। शहर के साथ ही आसपास के सटे हुए ग्रामीण क्षेत्रों में भी एचआरटीसी बसों का संचालन होता है। लोकल डिपो की एक दिन की कमाई दस लाख रुपये है लेकिन बसों में आए दिन आने वाले तकनीकी दिक्कतों के कारण कई रूट प्रभावित हो रहे हैं। इस वजह से स्कूली बच्चों के साथ ही सरकारी कर्मचारियों को भी आवाजाही में दिक्कतें झेलनी पड़ रही है। कई जगह रूट मिस भी हो रहे हैं। इसकी मुख्य वजह यह है कि बसों में तकनीकी दिक्कतों के कारण निगम प्रबंधन के लिए सभी रूटों पर नियमित रूप से सेवा देना मुश्किल हो गया है।
कोट्स एचआरटीसी की कई इलेक्टि्रक बसों की एमसी खत्म हो चुकी है। इसके लिए टेंडर प्रक्रिया चल रही है। इसके पूरे होने के बाद संबंधित कंपनी बसों के स्पेयर पार्ट्स से लेकर अन्य तकनीकी कार्यों को करेगी। इससे भविष्य में बसों की खराबी की दिक्कतें नहीं रहेंगी।
-निपुण जिंदल, प्रबंध निदेशक, एचआरटीसी