देश भले ही आजादी की 69वीं वर्षगांठ मना रहा है लेकिन हिमाचल के सिरमौर जिले की 25 पंचायतें आज भी गुलामों की तरह जिंदगी जीने को मजबूर हैं। संगड़ाह पंचायत में विकास कार्य तो दूर की बात है यहां सड़क, पानी, पुल जैसी मूलभूत सुविधाएं ही नहीं हैं। रेणुका बांध निर्माण के चलते 25 पंचायतों में पिछले 7 वर्षों से धारा 17/4 लागू है।
इसके चलते जनप्रतिनिधि विकास कार्यों में एक ईंट भी नहीं लगा सकते। संगड़ाह पंचायत के सिंयू, कांडवा और कुंठी गांव गिरी नदी और पालर खड्ड के बीच एक टापू में बसे हैं। बरसात के तीन महीनों में ग्रामीण गिरी नदी पर बने एक रोपवे पर निर्भर हो जाते हैं। पानी, राशन और रोजमर्रा की हर वस्तु के लिए रोपवे से नदी लांघनी पड़ती है।
बांस के सहारे पार होती है नदी
कांडवा गांव की अंजूबाला (15) उफनती गिरी नदी को रोपवे की रस्सियों से एक बांस के सहारे पार करती है। अमर उजाला ने पूछा तो बताया कि ट्राली के लिए लंबा इंतजार कौन करे, घराट से आटा लेने जा रही हूं, क्षेत्र में एक भी पैदल पुल नहीं है।
13 वर्षीय अभि ट्राली में बैठी नीतू (14) और पिंकी को ट्रॉली में खींचकर उस ओर ले जा रहा है। ये लोग पीने का पानी लेने जा रहे हैं। पंचायत प्रधान तपेंद्र चौहान ने कहा कि वर्ष 2008 में रेणुका डैम की वजह से 25 पंचायतों में विकास कार्य नहीं हो रहे हैं। लाडा के माध्यम से जो पैसा मिलता है उसे मरम्मत कार्यों पर खर्च किया जाता है।
इन 25 पंचायतों में ठप है निर्माण कार्य
पनार, दीद बगड़, कोटला मोलर, पराड़ा, लाना भल्टा, नेरी नावण, डिंबर, काथली भरण, सेर तंदूला, गवाही, संगड़ाह, रेड़ली, जरग, बाऊनल, काकोग, माईना गढ़ेल, रजाणा, जामू कोटी, ददाहू, खाला क्यार, बिरला, कटाह शीतला, पंजाहल, थाना कसोगा, कांडो कांसर और अंधेरी।
रेणुका बांध संघर्ष समिति सिरमौर के अध्यक्ष योंगेंद्र कपिला का कहना है कि समूचे क्षेत्र के लोग अपने घर तक नहीं बनवा पा रहे हैं। रेणुका डैम की जद्द में आने वाली 25 पंचायतों में अस्पताल, स्कूल, पुल, सड़कें तक नहीं बन रही हैं। यह पंचायतें पिछड़ गई हैं। इन पंचायतों में मनरेगा के काम भी नहीं हो सकते।
रेणुका बांध परियोजना के महाप्रबंधक बीके कौशल का कहना है कि रेणुका डैम के लिए अधिग्रहीत 25 पंचायतों में मुआवजा दिया जा रहा है। प्रभावित पंचायतों को 10-10 लाख रुपये लाडा के तहत दिए हैं। रेणुका विकास बोर्ड प्रभावित पंचायतों में विकास कार्य करवा रहा है।