अध्यापन के साथ बॉक्सिंग का जुनून बरकरार, पांच शिष्यों ने राष्ट्रीय विद्यालय प्रतियोगिताओं में जीते पदक
परिवार और खेल के बीच बनाया संतुलन
किन्नौर के जीएसएसएस रूपी स्कूल में हैं सेवारत
हर्षित शर्मा
शिमला। सरकारी स्कूल में इतिहास की कक्षा लेने के बाद छुट्टी होते ही जीएसएसएस रूपी किन्नौर की प्रवक्ता निशा नेगी की दूसरी भूमिका शुरू हो जाती है। वे बॉक्सिंग रिंग में उतरकर खिलाड़ियों को मुक्केबाजी की बारीकियां सिखाती हैं। अध्यापन उनका पेशा है, लेकिन बॉक्सिंग आज भी उनका सबसे बड़ा जुनून है। यही जुनून अब नई पीढ़ी के खिलाड़ियों को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभा रहा है।
निशा ने वर्ष 2013 में बॉक्सिंग की शुरुआत की थी। उस समय उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि एक दिन शिक्षक बनने के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों की कोच भी बनेंगी। सरकारी सेवा में आने के बाद भी उन्होंने खेल नहीं छोड़ा। शादी और दो बच्चों की जिम्मेदारियों के बीच भी उन्होंने बॉक्सिंग से अपना रिश्ता बनाए रखा। उनका कहना है कि परिवार के सहयोग और समय के बेहतर प्रबंधन ने उन्हें अपनी दोनों जिम्मेदारियां पूरी निष्ठा से निभाने का अवसर दिया।
इस वर्ष उनके प्रशिक्षण में तैयार खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन किया। जीएमएसएसएस भुंतर, कुल्लू की तन्वी ने 48 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक जीता। जीएसएसएस रक्षम, किन्नौर की राधिका ने 51 किलोग्राम वर्ग में कांस्य पदक जीता। वहीं, पीएम श्री राजकीय बाल वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, बिलासपुर के ऋषव ने स्वर्ण पदक जीतकर प्रदेश का गौरव बढ़ाया। निशा नेगी बताती हैं कि उनके प्रशिक्षण में तैयार कुल पांच खिलाड़ियों ने इस वर्ष अंडर-19 राष्ट्रीय विद्यालय प्रतियोगिताओं में पदक जीते। उनके लिए यह किसी भी व्यक्तिगत उपलब्धि से कहीं बड़ा सम्मान है।
चैंपियन तैयार करने के लिए खुद बहा रहीं पसीना
निशा रोजाना स्कूल की कक्षाएं पूरी करने के बाद खिलाड़ियों के साथ घंटों अभ्यास करती हैं। फिटनेस, फुटवर्क, पंचिंग तकनीक और मानसिक मजबूती पर वह बराबर ध्यान देती हैं। उनका मानना है कि अच्छा खिलाड़ी बनाने के लिए केवल शारीरिक प्रशिक्षण ही नहीं, बल्कि आत्मविश्वास भी जरूरी है। वह प्रतियोगिताओं से पहले खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ाने पर भी विशेष जोर देती हैं।
निशा का कहना है कि किन्नौर जैसे दूरदराज क्षेत्रों में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। यदि उन्हें सही कोचिंग, बेहतर सुविधाएं और लगातार अवसर मिलें तो वे राष्ट्रीय ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रदेश और देश का नाम रोशन कर सकते हैं। उनका सपना है कि उनके शिष्य एक दिन भारतीय टीम की जर्सी पहनकर एशियाई खेलों, विश्व चैंपियनशिप और ओलंपिक में तिरंगा बुलंद करें। उनके लिए विद्यार्थियों की हर जीत उनके अपने सफर की सबसे बड़ी उपलब्धि है।