अकेली रह गई निर्मला, नहीं थम रहे आंसू
बीआर चौहान
जुन्गा (शिमला)। जुन्गा तहसील के जोट गांव में भूस्खलन की घटना ने सभी को झकझोर कर रख दिया है। इस घटना में निर्मला ने न सिर्फ अपना परिवार खो दिया बल्कि घर भी तबाह हो गया। देर रात चंद सेकंड के भीतर ही निर्मला के सामने उसका हंसता खेलता घर-परिवार तबाह हो गया।
गांव के लोग निर्मला को हौसला बंधा रहे हैं लेकिन निर्मला के आंसू नहीं थम रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार निर्मला का पति वीरेंद्र खेतीबाड़ी और मजदूरी करके अपने परिवार का पालन पोषण कर रहा था। छह साल की बेटी के साथ दोनों बहुत खुश थे। रविवार रात भी सभी ने एकसाथ खाना खाया और सो गए लेकिन देर रात अचानक बारिश आफत बनकर टूट गई। एसडीआरएफ, पुलिस, होमगार्ड, मेडिकल की टीमें पैदल ही 15 किलोमीटर चलकर सुबह के समय मौके पर पहुंची। इसके बाद लोगों की मदद से बाप-बेटी के शव बाहर निकाले गए। मेडिकल टीम ने वीरेंद्र और दिव्यांशी का मौके पर ही पोस्टमार्टम किया। इसके बाद इनके शव परिजनों को सौंप दिए हैं। मृतक वीरेंद्र के मकान से थोड़ी दूरी पर उनके बड़े भाई रामकृष्ण का परिवार रहता है।
एसडीएम ग्रामीण मंजीत शर्मा ने वीरेंद्र की पत्नी निर्मला को एक लाख रुपये की फौरी राहत प्रदान की। इसके अतिरिक्त मकान बनाने के लिए सहायता और चार-चार लाख की मुआवजा राशि जल्द जारी की जाएगी। इस राहत कार्य में डीएसपी एसडीआरएफ गुलशन नेगी, एसएचओ ढली विरोचन नेगी, कंपनी कमांडर होम गार्ड दिनेश ठाकुर, वन रेंज अधिकारी संजीव मेहता, बलोग पंचायत केे प्रधान ओम प्रकाश शर्मा, जनेडघाट के प्रधान स्वरूप ठाकुर के अतिरिक्त राजस्व विभाग के कर्मचारियों ने भी मदद की।