समग्र शिक्षा निदेशक राजेश शर्मा के मार्गदर्शन और निपुण भारत की स्टेट नोडल अधिकारी डॉ. मंजुला शर्मा की निगरानी में स्कूलों में पहली कक्षा के लिए 30 मई को और दूसरी कक्षा के लिए 31 मई को बेसलाइन सर्वे कराया गया। बेसलाइन सर्वे के माध्यम से यह जानने का प्रयास किया गया है कि एफएलएन के क्षेत्र में बच्चों को कहां कठिनाई हो रही है और उन्हें किस प्रकार के शैक्षणिक सहयोग की आवश्यकता है। यह सर्वे केवल आंकड़ों का संकलन नहीं, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता सुधार की दिशा में एक ठोस और निर्णायक पहल है। इसके आधार पर शिक्षक प्रशिक्षण, शैक्षणिक सहायता, मूल्यांकन सामग्री और अन्य आवश्यक हस्तक्षेपों की योजना तैयार की जाएगी।
समग्र शिक्षा द्वारा कराए गए इस सर्वे के आधार पर चयनित 480 स्कूलों को गुणवत्तापूर्ण प्राथमिक शिक्षा के केंद्र बिंदु के रूप में विकसित किया जाएगा। इन विद्यालयों में श्रेष्ठ शिक्षण प्रक्रिया, संसाधनों का बेहतर उपयोग और नवाचारों का प्रभावी क्रियान्वयन किया जाएगा। निपुण लक्ष्य स्कूलों में विशेष गतिविधियों को भी शामिल किया जाएगा। जैसे- शिक्षकों का विशेष प्रशिक्षण, विद्यालयों को बाला आधारित शिक्षण वातावरण में परिवर्तित करना, नवाचारी शिक्षण विधियों का उपयोग, विद्यार्थियों की प्रगति की सतत निगरानी तथा अभिभावकों और समुदाय की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना। इन पहलों का उद्देश्य बच्चों के लिए एक समृद्ध, रोचक और सहयोगी अधिगम वातावरण तैयार करना है। इस तरह ये स्कूल अन्य विद्यालयों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेंगे।
उल्लेखनीय है कि निपुण लक्ष्य स्कूल योजना, निपुण भारत मिशन के अंतर्गत हिमाचल प्रदेश की एक विशेष पहल है, जिसका लक्ष्य है कि प्रदेश का हर बच्चा कक्षा दो तक मूलभूत भाषा एवं गणना कौशल में दक्ष बन सके। समग्र शिक्षा द्वारा कराया गया बेसलाइन सर्वे न केवल प्राथमिक शिक्षा की वास्तविक स्थिति को समझने का एक मजबूत माध्यम बनेगा, बल्कि यह सुनिश्चित करेगा कि हिमाचल का हर बच्चा गुणवत्तापूर्ण बुनियादी शिक्षा प्राप्त कर सके। यह प्रयास हिमाचल प्रदेश को बेसिक लर्निंग में अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
सरकारी स्कूलों के बच्चों ने दी आईक्यू लेबल परख परीक्षा
लर्निंग एनहांसमेंट प्रोग्राम के तहत बच्चों का आईक्यू लेबल परखने के लिए सरकारी स्कूल के विद्यार्थियों की हिंदी और अंग्रेजी की अंतिम परीक्षा हुई। सुबह 10 से 11:30 बजे तक इसका आयोजन किया गया। इसमें बच्चों ने ओसीआर शीट पर 90 मिनट में 50 प्रश्नों के जवाब दिए। वहीं परिणाम के आधार पर कमजोर बच्चों को स्कूलों में विशेष कोचिंग दी जाएगी। कार्यक्रम जिला समन्ववक बबीता ठाकुर ने बताया कि परीक्षा में विद्यार्थियों को उनकी पिछली कक्षाओं के विषय से प्रश्न पत्र तैयार किया था।
टेस्ट के बीच समग्र शिक्षा की टीम ने स्कूलों का निरीक्षण भी किया गया है। शिक्षकों को बच्चों द्वारा दिए टेस्ट की ओसीआर शीट को समय पर स्कैनिंग कर अपलोड करने के निर्देश दिए गए हैं। अंतिम टेस्ट के बाद जल्द अध्यापकों के लिए भी विशेष प्रशिक्षण शिविर लगाए जाएंगे। इसमें अध्यापकों को एलईपी के तहत बच्चों को पढ़ाने के टिप्स दिए जाएंगे। समग्र शिक्षा जिला अधिकारी डॉ. राजेंद्र वर्मा ने बताया कि परीक्षा के बाद विद्यार्थियों का परिणाम भी निदेशालय की ओर से जारी किया जाएगा। इसमें शिक्षा में कमजोर बच्चों को विशेष कोचिंग दी जाएगी।