मुख्य मार्ग का 100 मीटर हिस्सा पानी में डूब गया है।
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पावर प्रोजेक्ट से पानी छोड़ने की वजह से किन्नौर जिले में उरनी ढांक के पास एनएच-5 दूसरे दिन सोमवार को भी ठप रहा। मुख्य मार्ग का 100 मीटर हिस्सा पानी में डूब गया है। सोमवार को सभी वाहनों को टापरी, चगांव वाया उरनी चौलिंग से भेजा गया। एनएच-5 उरनी ढांक के पास बंद होने से लोगों को 20 किलोमीटर अतिरिक्त सफर करना पड़ रहा है।
बता दें कि उरनी ढांक के पास मलबे की वजह से पानी ने झील जैसा रूप ले लिया है। इससे एनएच-5 पर 8 करोड़ से हाल ही में बने दो पुलों को भी खतरा हो गया है। पुल बहे तो किन्नौर क्षेत्र देश-दुनिया से कट सकता है। सामरिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण एनएच-5 तिब्बत सीमा तक जाता है।
यात्रियों में रोष है कि एक हजार मेगावाट की कडछम वांगतू परियोजना संचालन कर्ता जेएसडब्ल्यू बांध से गाद साफ करने के लिए लोगों की आवश्यक सेवाओं से खिलवाड़ कर रहा है। सतलुज में पानी और सिल्ट की मात्रा बढ़ने से कडछम बांध के रेडियल गेट खोल दिए और करीब 70 क्यूमेक्स पानी अतिरिक्त छोड़ा गया। इसका असर उरनी ढांक के पास बने पुल और सड़क पर पड़ा है।
उधर, एसडीओ एनएच प्राधिकरण आरके राजगौड़ ने बताया कि जलस्तर बढ़ने से सड़क क्षतिग्रस्त हुई है। अब जलस्तर कम हो गया है। क्षतिग्रस्त सड़क को दुरुस्त करने के लिए जेसीबी के साथ कर्मचारी लगे हुए हैं। देर शाम तक यातायात बहाल कर दिया जाएगा। उधर, कंपनी प्रबंधन का कहना है कि हर साल बरसात शुरू होने से पहले बांध से पानी छोड़ा जाता है।
बाकायदा इसकी सूचना जिला प्रशासन को दी जाती है। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन के विशेष सचिव डीडी शर्मा ने कहा कि उरनी ढांक के पास खतरे को देखते हुए एनएच प्राधिकरण को आदेश दिए गए हैं। प्राधिकरण जेएसडब्ल्यू कंपनी के साथ मिलकर दोनों पुलों को सुरक्षित करने के लिए हर संभव कार्य शुरू करेगा।