पर्यावरण मंत्रालय सहित प्रदेश के मुख्य वन अरण्यपाल, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, डीसी ऊना को इस कमेटी का सदस्य बनाया गया है। ट्रिब्यूनल ने कमेटी को आदेश दिए कि वह इस मामले की जांच करे और अपनी अनुपालना रिपोर्ट ई-मेल के माध्यम से 28 सितंबर तक ट्रिब्यूनल को भेजे।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने ऊना में 200 आम के पेड़ों की काट-छांट पर कड़ा संज्ञान लिया है। न्यायिक सदस्य अरुण कुमार त्यागी और सदस्य अफरोज अहमद ने इसकी जांच के लिए संयुक्त कमेटी का गठन किया है। पर्यावरण मंत्रालय सहित प्रदेश के मुख्य वन अरण्यपाल, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, डीसी ऊना को इस कमेटी का सदस्य बनाया गया है। ट्रिब्यूनल ने कमेटी को आदेश दिए कि वह इस मामले की जांच करे और अपनी अनुपालना रिपोर्ट ई-मेल के माध्यम से 28 सितंबर तक ट्रिब्यूनल को भेजे। स्थानीय निवासी अविनाश विद्रोही ने पत्र के माध्यम से नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल को अवैध काट-छांट के बारे में शिकायत की है।
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बताया गया कि दौलतपुर-गगरेट-गुगलेहड़ सड़क के किनारे लगभग 200 पेड़ों की अवैध काट-छांट की गई। लोक निर्माण विभाग ने सड़क की तरफ की टहनियों को बिना किसी अनुमति के काटा है। इससे पर्यावरण का नुकसान हो रहा है। विभाग ने पर्यावरण को बचाने के लिए हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट की ओर से समय-समय पर पारित आदेशों की अवहेलना भी की है। ट्रिब्यूनल ने पाया कि पत्र में लगाए गए आरोप गंभीर हैं। इसकी जांच और रोकथाम जरूरी है। ट्रिब्यूनल ने कमेटी को आदेश दिए कि वह याचिकाकर्ता के आरोपों की जांच करे और इसके रोकथाम के लिए कानूनी तौर पर आवश्यक कदम उठाएं।