शिमला में सिटी डेवलपमेंट प्लान लागू करने पर एनजीटी की रोक
- फोटो : अमर उजाला
हिमाचल प्रदेश के शिमला शहर और प्लानिंग एरिया में भवन निर्माण के नियमों में राहत देने के लिए सरकार के सिटी डेवलपमेंट प्लान पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने रोक लगा दी है। नगर निगम चुनाव से ठीक पहले प्लान लागू करने की तैयारी कर रही सरकार को इससे झटका लगा है। प्रदेश की राजधानी शिमला में एनजीटी के साल 2017 में पारित आदेशों के अनुसार भवन निर्माण पर पाबंदियां जारी रहेंगी। शिमला निवासी योगेंद्र मोहन सेन गुप्ता की याचिका पर सुनवाई करते हुए एनजीटी ने इस बारे में सरकार को सख्त दिशा-निर्देश दिए हैं। मुख्य सचिव को यह आदेश सख्ती से लागू करने के लिए कहा है। एनजीटी ने साल 2017 में शहर के कोर और ग्रीन एरिया में भवन निर्माण पर रोक लगा दी थी।
नॉन कोर एरिया में भी सिर्फ ढाई मंजिल भवन निर्माण की छूट थी। उधर, सरकार ने इन पाबंदियों से राहत देने के लिए टीसीपी विभाग से नया डेवलपमेंट प्लान तैयार करवाया था। इसमें शहर के कोर और ग्रीन एरिया में पाबंदी हटाने का प्रावधान था। प्लानिंग एरिया में ढाई मंजिला भवन निर्माण की शर्त भी हटाने का फैसला लिया था। इस प्रस्ताव को कैबिनेट ने भी मंजूरी दे दी थी। विधि विभाग इसकी अधिसूचना जारी करने वाला था कि इससे पहले ही एनजीटी ने रोक लगा दी है। साथ ही साल 2017 में जारी आदेशों को सख्ती से लागू करने के लिए कहा है। यह भी टिप्पणी की है कि प्रदेश सरकार ने ट्रिब्यूनल के आदेशों को दरकिनार करने की कोशिश की है। हालांकि दो माह बाद इस मामले पर एनजीटी में सुनवाई हो सकती है।
कोर्ट के आदेश पर एमसी ने खुद तोड़ा अपना निर्माण
वहीं, राजधानी के संजौली बाजार में चिल्ड्रन पार्क में सार्वजनिक शौचालय बना रहे नगर निगम को अब खुद ही इस निर्माण कार्य पर हथौड़ा चलाना पड़ा है। कोर्ट के आदेशों के बाद नगर निगम ने यह निर्माण कार्य तुड़वा दिया है। वीरवार से ही ठेकेदार के मजदूर निर्माण तोड़ने में जुटे हैं। शुक्रवार को इसे लगभग पूरा तोड़ दिया है। नगर निगम ने कुछ दिन पहले ही इस जगह शौचालय का निर्माण शुरू करवाया था। निगम का दावा था कि बाजार के कारोबारी यहां सार्वजनिक शौचालय की मांग कर रहे हैं। पार्क में पहले भी शौचालय थे जिनकी जगह निगम ने बुक कैफे बना दिया। अब पार्क में ही दूसरी जगह शौचालय बन रहे थे।
बाकायदा मौके पर लाखों रुपये का काम भी कर दिया गया है। काम का जिम्मा एक भाजपा नेता को दिया था। स्थानीय लोग इसका विरोध कर रहे थे। इनका कहना था कि यहां शौचालय नहीं बनने चाहिए। निगम ने इनकी बात नहीं सुनी तो लोग कोर्ट पहुंच गए। कोर्ट ने इनकी याचिका पर नगर निगम को यह निर्माण तोड़ने के आदेश दिए हैं। स्थानीय पार्षद आरती चौहान ने कहा कि नगर निगम ने निर्माण कार्य तोड़ दिया है। महापौर सत्या कौंडल ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेशों की अनुपालना की है।