हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने वेतन विसंगति के मामले में महत्वपूर्ण व्यवस्था दी है। न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर ने निर्णय सुनाया है कि वरिष्ठ कर्मचारी को किसी भी सूरत में उसके कनिष्ठ से कम वेतन नहीं दिया जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि भले ही दोनों को वेतन वृद्घि का लाभ दिया गया हों, लेकिन इस विसंगति को अनिश्चित काल के लिए नहीं रखा जा सकता। नियमानुसार वरिष्ठ कर्मचारी को कनिष्ठ कर्मचारी के बराबर वेतनमान दिया जाना चाहिए। अदालत ने जल शक्ति विभाग में कार्यरत कनिष्ठ अभियंता को वर्ष 2007 से वेतन वृद्घि का लाभ दिए जाने के आदेश दिए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता बिपन चंद को यह लाभ 30 अक्टूबर 2022 से पहले दिया जाए। अदालत के आदेशों की अनुपालना न किए जाने पर वेतनमान की बकाया राशि पांच फीसदी ब्याज सहित अदा करनी होगी।
अदालत ने ब्याज की राशि दोषी अधिकारी से वसूलने के आदेश दिए हैं। याचिकाकर्ता ने अदालत से गुहार लगाई थी कि विभाग को वर्ष 2006 से वेतन वृद्घि दिए जाने के आदेश दिए जाएं। याचिकाकर्ता वर्ष 1978 में कनिष्ठ अभियंता के पद पर नियुक्त हुआ था और वर्ष 2015 में वह बतौर अधीक्षण अभियंता के पद से सेवानिवृत हुआ था। दलील दी गई कि प्रतिवादी अरुण पराशर शुरू से ही याचिकाकर्ता से कनिष्ठ रहा। विभाग ने वर्ष 1996 से प्रतिवादी को याचिकाकर्ता से अधिक वेतनमान दिया। इस विसंगति को लेकर याचिकाकर्ता ने विभाग के पास प्रतिवेदन किया, जिसे विभाग ने खारिज कर दिया था। अदालत ने मामले से जुड़े तमाम रिकॉर्ड का अवलोकन करते हुए यह निर्णय सुनाया।