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हिमाचल: मानसून आपदा मामले में एनजीटी सख्त, प्रधान सचिव पेश नहीं हुए तो मुख्य सचिव को देना होगा जवाब

Fri, 16 Oct 2026 02:45 PM IST
Ankesh Dogra न्यूज डेस्क, अमर उजाला नेटवर्क, शिमला

सार

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने हिमाचल प्रदेश में मानसून आपदा और कथित पर्यावरणीय उल्लंघनों से जुड़े मामले में प्रधान सचिव, नगर एवं ग्राम नियोजन के 13 अक्टूबर 2026 को वर्चुअल रूप से उपस्थित न होने पर सख्त रुख अपनाया है। अधिकरण ने मुख्य सचिव को अगली सुनवाई में प्रधान सचिव की उपस्थिति सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।
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एनजीटी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश में वनों की कटाई, अनियोजित निर्माण और अवैध खनन से हुई तबाही से जुड़े मामले में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने राज्य सरकार के अधिकारियों के पेश न होने पर कड़ा रुख अपनाया है। अध्यक्ष न्यायाधीश प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अफरोज अहमद की पीठ ने आदेशों का पालन न करने पर कड़ी नाराजगी जताई है। पिछली सुनवाई में अधिकारियों के अनुपस्थित रहने पर एनजीटी ने हिमाचल प्रदेश के नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग के प्रधान सचिव को 13 अक्तूबर को वर्चुअल माध्यम से पेश होने का निर्देश दिया था।

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इसके बावजूद वे न तो खुद पेश हुए और न ही कोई छूट याचिका दायर की। अधिकरण ने आदेश का स्पष्ट उल्लंघन मानते हुए हिमाचल प्रदेश के मुख्य सचिव को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई पर नगर एवं ग्राम नियोजन के प्रधान सचिव की वर्चुअल उपस्थिति दर्ज कराई जाए। एनजीटी ने स्पष्ट किया है कि यदि संबंधित अधिकारी अगली सुनवाई में उपस्थित नहीं होते हैं, तो मुख्य सचिव को स्वयं अदालत में वर्चुअली पेश होकर जवाबदेही तय करनी होगी। मामले की अगली सुनवाई 22 जनवरी को होगी। इसके साथ ही आदेश की प्रति तुरंत मुख्य सचिव को भेजने के निर्देश दिए हैं।
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