तकनीक यह है खासियत
यूएचपीएफआरसी तकनीक में उन्नत निर्माण सामग्री रहती है जो पारंपरिक कंक्रीट की तुलना में अधिक मजबूत और टिकाऊ होती है। इसमें संपीड़न शक्ति पारंपरिक कंक्रीट की तुलना में बहुत अधिक होती है। उच्च तन्य शक्ति होना इसे अधिक लचीला बनाता है। इसे खारे पानी और अन्य हानिकारक तत्वों के लिए भी अधिक प्रतिरोधी होता है। यूएचपीएफआरसी में कम रखरखाव की आवश्यकता होती है क्योंकि यह अधिक टिकाऊ और कम नुकसान के प्रति संवेदनशील होता है। यह लंबे पुलों के लिए सबसे अधिक उपयुक्त रहता है। इमारतों के अलावा सुरंगें, जलाशय और पानी की पाइपलाइन में भी इसे इस्तेमाल लाया जा सकता है। इस तकनीक में कंकरीट एफ 155 का इस्तेमाल होता है। जबकि पारंपरिक गडर में एम 50 का इस्तेमाल होता है।
यूएचपीएफआरसी तकनीक से बने गडर का इस्तेमाल तीन पुलों में किया जा रहा है। इस तरह की तकनीक से बने गडर पहली बार उत्तरी भारत में इस्तेमाल हो रहे हैं। -वरुण चारी, परियोजना निदेशक, एनएचएआई मंडी इकाई