वेतन और पेंशन का अलग-अलग स्पष्ट लेखा
नई व्यवस्था में वेतन, मजदूरी, भत्ते, चिकित्सा प्रतिपूर्ति, प्रशिक्षण और अवकाश यात्रा रियायत जैसे मदों को अलग-अलग श्रेणियों में दर्ज किया जाएगा। पहले पेंशन और सामाजिक सुरक्षा व्यय के व्यय व्यापक श्रेणियों में दिखाई देते थे, लेकिन अब कर्मचारियों की पेंशन, ग्रेच्युटी और एनपीएस-यूपीएस में सरकारी अंशदान को अलग मद में रखा जाएगा। वहीं वृद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन, दिव्यांग सहायता और अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का खर्च अलग श्रेणी में दर्ज होगा।
आउटसोर्सिंग और कंसल्टेंसी खर्च भी आएंगे सामने
सरकारी विभागों में बढ़ती आउटसोर्सिंग को देखते हुए सुरक्षा कर्मियों, डेटा एंट्री ऑपरेटरों, हाउसकीपिंग स्टाफ और अन्य संविदा आधारित सेवाओं पर होने वाले खर्च को अलग पहचान दी गई है। सलाहकारों, कानूनी विशेषज्ञों, तकनीकी सलाहकारों और ऑडिट एजेंसियों पर होने वाले खर्च को प्रोफेशनल सर्विसेज के तहत दर्ज किया जाएगा।
छात्रवृत्ति, सब्सिडी और अनुदानों की होगी अलग पहचान
छात्रवृत्तियों, अनुदानों और सब्सिडी को नई व्यवस्था में अलग-अलग श्रेणियों में दर्ज किया जाएगा। इससे यह पता लगाना आसान होगा कि किसी विशेष योजना पर कितना व्यय हुआ, किस वर्ग को लाभ मिला और विभिन्न कल्याणकारी कार्यक्रमों का वास्तविक वित्तीय आकार क्या है।