हिमाचल के विभिन्न क्षेत्रों में बिना सर्वे नई सब्जी मंडियों का निर्माण किया गया है। पूर्व कांग्रेस शासनकाल में करोड़ों रुपये खर्च कर करीब डेढ़ दर्जन नई सब्जी मंडियां खोल दी गईं, लेकिन इनका इस्तेमाल नहीं हो रहा है। कई सब्जी मंडियों के भवन बने दो साल से ज्यादा का समय हो गया है। मंडी तक पहुंचने के लिए छोटी गाड़ियां ले जाने का रास्ता तक नहीं है।
हैरानी की बात है कि नई सब्जी मंडियों का निर्माण तो करा दिया गया, लेकिन इससे पहले सर्वे तक नहीं किया गया कि यहां सब्जी मंडी चलेगी या नहीं। नई सब्जी मंडियां खासकर हमीरपुर, चंबा और कुल्लू जिले में विकसित की गई थीं। इनके निर्माण पर करोड़ों रुपये खर्चे गए।
जब इनकी दुकानें और गोदाम किराए पर चढ़ाने का समय आया तो ये खाली रह गए। इन दुकानों और गोदामों को किराए पर लेने वाले नहीं मिले। इससे भी एपीएमसी को लाखों की चपत लग चुकी है। यही स्थिति निरमंड क्षेत्र में बनी नई सब्जी की है।
सब्जी मंडी बनने के बाद भी दुकानें खाली पड़ी हैं। भवन के एक फ्लोर में किसानों के लिए गेस्ट हाउस भी बनाया गया है। इसका भी उपयोग नहीं हो रहा है। सब्जी मंडी तक पहुंचने के लिए छोड़ी गाड़ियों का रास्ता तक तैयार नहीं है। किसानों को मंडी से सब्जी या फल बेचने जाना हो तो गाड़ी नहीं पहुंच सकती। करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी किसानों-बागवानों को कोई फायदा नहीं हुआ है।
क्या कहते हैं कृषि मंत्री मारकंडा
राज्य के कृषि मंत्री रामलाल मारकंडा ने कहा कि पूर्व सरकार ने बिना सर्वे के नई सब्जी मंडियों का निर्माण किया है। यह तक पता लगाने की कोशिश नहीं की गई कि सब्जी मंडियों का लाभ क्षेत्र के कितने किसानों-बागवानों को मिलेगा।
निरमंड सब्जी मंडी का उन्होंने स्वयं दौरा किया। वहां दुकानों खाली पड़ी हैं। एक फ्लोर में बना गेस्टहाउस उपयोग में नहीं आ रहा। निरमंड सब्जी मंडी तक छोटे वाहनों ले जाने के लिए रास्ता तक नहीं है।