कैंसर के मरीजों के लिए बड़ी खबर है। हेड एंड नैक कैंसर से पीड़ित मरीजों को अब बेहतर उपचार मिलेगा। सर्जरी के दौरान मरीजों के अंग कटने से बच जाएंगे। इस पर आईजीएमसी के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने शोध किया है।
वरिष्ठ डॉक्टरों की मेहनत जल्द यूरोपियन जरनल ऑफ रेडियोलॉजी ओपन में नजर आने वाली है। आईजीएमसी के प्रोफेसर डॉ. संजीव शर्मा, डा. बलराज, डॉ. रविंद्र मिंहास, डा. मनोज गुप्ता और सहायक प्रोफेसर डा. शिखा सूद के सहयोग से डॉ. लोकेश राणा शोध पूरा करने में कामयाब रहे हैं।
यह शोध हेड एंड नैक कैंसर से पीड़ित मरीजों को लेकर किया गया है। पिछले एक साल से चल रहे इस शोध कार्य के जो परिणाम सामने आए है, उन्हें देख कर डॉक्टर इस बात का दावा कर रहे हैं कि अब इस तरह के मरीजों को घबराने की जरूरत नही।
दुनिया में पहली बार मिली कामयाबी
दोनों डॉक्टरों ने हेड एंड नेक कैंसर से ग्रस्त मरीजों का परफ्यूज़न सीटी स्कैन किया जो अपनी तरह की एक नई जांच है। विश्व में अभी तक ऐसा शोध पहली बार हुआ है, जिसको देखते हुए अमेरिका और साउथ कोरिया में पेपर पढ़ने के लिए आमंत्रित किया है।
अमेरिका के लास वेगास और साउथ कोरिया के बुसान में इस वर्ष दिसंबर में होने वाली कांफ्रेंस में यह शोध पढ़ा जाएगा। डॉक्टर इस बीमारी से मरीजों को मुक्ति दिलाने के लिए इस नई खोज को सफल करार दे रहे हैं।
उनका कहना है कि ऐसे मरीजों के उपचार से पहले यह पता लगाया जा सकेगा कि क्या किमोथैरिपी से उन्हें असर भी होगा कि नही।
इस तरह का पहला शोध
प्रोफेसर संजीव शर्मा ने इस सफलता के लिए डॉ. लोकेश राणा को बधाई दी और कहा कि यह पहली बार है जब इस तरह के शोध को खुद यूरोपियन जरनल ऑफ रेडियोलॉजी ने स्वीकार किया और कांफ्रेंस में आमंत्रित किया।
यह देश के साथ साथ आईजीएमसी के लिए भी गौरव की बात है। इसमें विभिन्न विभागों के विशेषज्ञ डाक्टरों का भी सहयोग शामिल है जिनकी वजह से शोध पूरा हो पाया। वहीं, कैंसर पीड़ितों के लिए भी यह शोध नई उम्मीद लेकर आया है।