हिमाचल प्रदेश में अब पानी की उपलब्धता होने पर नए प्रोजेक्टों को मंजूरी मिलेगी। जब तक पानी का प्रबंध नहीं होगा, तब तक राज्य सरकार का जलशक्ति विभाग अनिवार्यता प्रमाणपत्र नहीं देगा। हालांकि प्रोजेक्ट प्रमोटर अगर खर्च उठाएगा तो जलशक्ति विभाग पानी का प्रबंध करके देगा और उसके बाद प्रोजेक्ट लगाने को हरी झंडी देगा। राज्य में पानी के स्रोतों पर पड़ रहे बोझ के कारण सरकार ने यह निर्णय लिया है। होटल, उद्योग समेत छोटे-मोटे सभी प्रोजेक्ट इसमें शामिल हैं। मुख्य सचिव संजय गुप्ता ने राज्य सरकार के जलशक्ति विभाग के प्रमुख अभियंता को पत्र जारी कर यह भी कहा है कि यदि किसी क्षेत्र में जल शक्ति विभाग की मौजूदा पेयजल योजना उपलब्ध नहीं है तो पहले उस प्रोजेक्ट के लिए संभावित जल आवश्यकता का आकलन किया जाएगा। उसी के अनुसार नई जलापूर्ति योजना प्रस्तावित की जाएगी। इसके लिए प्रोजेक्ट के प्रमोटर को विभाग की ओर से तय की गई राशि जमा करनी होगी।