हिमाचल में जहां विधायकों को नया वेतन जारी कर दिया गया है, वहीं पूर्व विधायकों और उनके आश्रितों को बढ़ी हुई पेंशन नहीं मिली है। सरकार ने राज्यपाल की मंजूरी के बाद दो महीने पहले इसकी अधिसूचना जारी की थी।
मगर महालेखाकार कार्यालय में पेंशन से संबंधित फाइल रुकी होने से इन्हें ये लाभ नहीं मिला है। प्रदेश में पूर्व विधायकों की संख्या 120 के आसपास है। उनके आश्रितों की संख्या 40 के आसपास बताई जाती है।
इसी वित्त वर्ष के बजट सत्र में प्रदेश विधानसभा में बिल पारित कर सरकार ने पेंशन बढ़ाई गई थी। वर्ष 1971 में बने प्रदेश विधानसभा भत्ते एवं पेंशन अधिनियम में विधायकों के लिए 5000 रुपये मासिक पेंशन का प्रावधान किया था।
बाद में कई संशोधनों के बाद यह 22000 रुपये पहुंच गई थी। इसे सात अप्रैल, 2016 को विधानसभा में कानून पारित कर 36000 रुपये कर दिया गया। विधायक सुविधा समिति की संस्तुति के बाद प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र में सरकार ने पहले इस पेंशन को 22 हजार से बढ़ाकर 28 हजार रुपये करने का फैसला लिया था।
पूर्व विधायकों के दबाव के बाद और बढ़ी पैंशन
पूर्व विधायकों के दबाव में इसे और बढ़ाकर 36 हजार रुपये प्रतिमाह किया गया। 36 हजार मासिक पेंशन में वर्तमान में देय डीए की 119 प्रतिशत किस्त को जोड़ा जाए तो एक पूर्व विधायक को पेंशन के रूप में 78,840 रुपये मासिक मिलेंगे।
दो टेन्योर में विधायकों के लिए पेंशन अब हर साल 1000 रुपये की दर से बढ़ती जाएगी। नई बढ़ोतरी के बाद कई पूर्व विधायकों की पेंशन 80 हजार से अधिक हो गई है। पेंशन लेने वाले पूर्व विधायक की अगर मृत्यु होती है तो उसका परिवार भी पेंशन का हकदार हो जाता है।
परिवार में विधवा पत्नी या पत्नी के न होने पर कानूनी तौर पर वारिस माइनर बच्चे को आधी पेंशन मिलती है। ऐसे में प्रदेश में पूर्व विधायकों के अलावा उनके आश्रितों को भी बढ़ी हुई पेंशन का लाभ नहीं मिला है।
हिमाचल सरकार ने अधिसूचना जारी की है, मगर महालेखाकार कार्यालय से अभी तक पेंशन पे ऑर्डर (पीपीओ) जारी नहीं हुआ है। इसी वजह से पूर्व विधायकों को संशोधित और बढ़ी हुई पेंशन जारी नहीं हुई है, जबकि विधायकों को जारी हो गई है। उम्मीद है पूर्व विधायकों और उनके आश्रितों को ये लाभ एरियर के साथ जल्द मिलेगा।- भगतराम चौहान, महासचिव, पूर्व विधायक परिषद